बदलती लाइफस्टाइल से बढ़ी गर्भपात की समस्या

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 05-06-2018 / 12:00 AM
  • Update Date: 05-06-2018 / 12:02 AM

पारुल पांडेय, मुंबई: मिसकॅरेज यानी विज्ञान की भाषा में प्राकृतिक गर्भपात। आएदिन अब गर्भपात  प्रमाण का ग्राफ बढ़ता ही नज़र आ रहा है। डॉक्टरों द्वारा  मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग में सुविधाओं के अभाव, लोगों का अशिक्षित होना और पौष्टिक आहार न मिलना ही महिलाओं में बढ़ते मिसकैरेज का कारण है ।

पूरे देशभर में पिछले साल तक कुल 5,55,213 महिलाओं का मिसकैरेज हुआ है, जिनके तहत पश्चिम बंगाल का स्थान सबसे ऊपर है । यहां 75,202 महिलाओं को प्राकृतिक गर्भपात से गुज़रना पड़ा है। वहीं महाराष्ट्र राज्य का प्रमाण 60,495 है और राजस्थान का आंकड़ा 57,206 तक रहा ।

कुछ ऐसा ही हाल मुंबई मायानगरी का भी है। महिलाओं की जीवनशैली में आते प्रतिदिन बदलाव के चलते महिलाओं में हार्मोन्स बदलने की समस्या अब आम हो गई है। ऐसे में मुंबई में भी  मिसकैरेज का प्रमाण बढ़ रहा है। साल 2017-18 में मुंबई में कुल 11,763 महिलाओं को मिसकैरेज से गुजरना पड़ा, वहीं पुणे में 8,571 और 5,528  गर्भवती महिलाओं का तीसरे अथवा पाँचवे महीने में मिसकैरेज का सामना करना पड़ा। यह आंकड़े केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के हॉस्पिटल मॅनेजमेंट इन्फॉर्मेशन सिस्टम  (एचएमआयएस) द्वारा मिली जानकारी से सामने आई है।

मुंबई महापालिका के  सायन अस्पताल के  स्त्रीरोग विभाग के प्राध्यापक डॉ. निरंजन चौहान ने बताया की अन्य राज्यों के साथ-साथ मुंबई जैसे शहरी भाग में भी मिसकैरेज का प्रमाण बढ़ता नज़र आ रहा है। इसका एक कारण बढ़ते तापमान को भी माना जा रहा है। शहरी भागों में कामकाजी कई महिलाएं घंटों घर से बाहर रहतीं हैं। ऐसे में यात्रा करते समय रास्तों पर पड़े खड्ढे भी महिलाओं में मिसकैरेज का अहम कारण हैं।

डॉ. चौहान ने आगे बताया कि “फॅमिली प्लॅनिंग  करते वक्त लोगों को डॉक्टरों से सलाह लेनी चाहिए। पानी छूटते ही तुरंत डॉक्टर के पास जाकर जांच करवानी चाहिए। गर्भावस्था के दौरान हरी सब्जियां, पौष्टिक आहार, भरपूर पानी का सेवन और समय -समय पर डॉक्टर से जांच करवानी जरूरी है। साथ ही गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीने में शारीरिक संबंध न रखना लाभदायक है।

गर्भवती महिलाओं में होनेवाले गर्भपात के कई कारण हैं जिसके तहत साधारणतः प्रत्येक पाच महिलाओं में से  एक महिला प्राकृतिक  गर्भपात का शिकार होती हैं। इनके तहत गर्भवती महिलाओं में अनीमिया का बढ़ता पराम्तआण भी एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है। अप्रैल साल 2018 महीने में राज्य में 3,389 वहीं मुंबई में 822 अनीमिया ग्रस्त महिलाओं का गर्भपात दाखिल किया गया है।

मिसकैरेज के अहम कारण
  • बढ़ता कुपोषण का प्रमाण
  • शिक्षण का अभाव
  • काम का अत्यधिक दबाव
  • परिवार का शारीरिक और मानसिक सहायता न मिलना
  • गर्भावस्था के दौरान खाने पीने पर सही ध्यान न देना
  • शहर में बढ़ रहा तापमान
  • युवाओं में बढ़ रही ‘पीसीओएस’ की समस्या
  • हायपोथॉयरॉईड की समस्या

वहीं नागपुर स्थित स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. सुषमा देशमुख ने बताया कि ग्रामीण भाग में गर्भवती मगिलाओं में मिसकैरेज का प्रमाण प्रतिदिन बढ़ता नज़र आ रहा है। इसका मुख्य कारण कुपोषण मन जा रहा है। गर्भावस्था में महलाओं को पौष्टिक आरआर न मिल पाने के कारण कमजोर पड़ जाती हैं। ऐसे में महिलाओं में गर्भपात के जोखिम और बढ़ जाता है। शिक्षित न होने के कारण मगिलाओं को अपनी देखभाल रखने का ज्ञान नही होता है।

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