…तो इसलिए भगवान गणेश को लगाया जाता है मोदक का भोग

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 12-09-2018 / 7:25 PM
  • Update Date: 12-09-2018 / 7:25 PM

इस साल गणेश चतुर्थी की शुरुआत 13 सितंबर से हो रही है। इसके लिए भक्त तैयारियों में जुटे हैं। गजानन के भक्तों में उनके आगमन को लेकर उत्सुकता भी बढ़ती जा रही है। गणेश चतुर्थी ही नहीं, बल्कि कई अन्य त्योहारों में सबसे पहले गणेश जी की पूजा होती है। दरअसल इसके पीछे मान्यता है कि गणेश जी की पूजा करने से किसी भी शुभ कार्य में कोई विघ्न, बाधा नहीं आती है। जो कार्य आप कर रहे हैं, वह सकुशल संपन्न होता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है।

आपने भगवान गणेश की मूर्ती के समाने मोदक रखा देखा होगा जो उन्‍हें बेहद प्रिय है। शास्त्रों के अनुसार गणेश जी को मोदक चढ़ाने से वह जल्‍दी प्रसन्न होते हैं। वैसे तो उन्‍हें रसगुल्ला, मालपुआ, रसमलाई और लड्डू का भोग भी चढ़ाया जाता है मगर मोदक के आगे ये सब बेकार हैं। मोदक का अर्थ आनन्‍द देने वाला माना जाता है। मोदक ज्ञान का प्रतीक माना जाता है इसलिए यह ज्ञान के देवता गणेश जी का अतिप्रिय भोग है। यहां जानें, गणपति बप्‍पा को मोदक चढ़ाने के पीछे क्‍या वजह है।

एक बार की बात है जब गणेश जी परशुराम से युद्ध कर रहे थे और तभी उनका एक दांत टूट गया था। जिसके बाद से उन्‍हें कुछ भी खाने में परेशानी होने लगी। तभी उनके लिए मोदक तैयार किया गया जिसे आराम से खाया जा सकता था और खाने के बाद उसका मीठा स्वाद मन को आनंदित कर देता था। भगवान गणेश को मोदक इसलिए भी पसंद हो सकता है क्‍योंकि यह मन को खुश करता है। शास्त्रों के अनुसार गणपति जी सदा खुश रहने वाले देवता माने गए हैं।

और अगर आप मोदक शब्‍द पर गौर करें तो इसका मतलब होता है खुशी। बाहर से कड़ा मगर अदंर से नरम और मिठास होता है। उसी प्रकार से घर का सबसे बड़ा व्‍यक्‍ति यानि मुखिया ऊपर से सख्‍त और अंदर से नरम हो कर घर में नियमों का पालन करवाए तो उस घर में हमेशा सुख-शांति बनी रहती है। वे भक्‍त जो गणेश जी को मोदक का भोग लगाते हैं उन्‍हें जीवन की हर परेशानी से मुक्‍ति मिलती है और उनकी समस्त कामनाएं पूर्ण होती है।

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