वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पेश किया बजट… मिडिल क्लास के लिए बड़ा ऐलान… घर खरीदने पर मिलेगी ये छूट…

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 05-07-2019 / 2:05 PM
  • Update Date: 05-07-2019 / 2:05 PM

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के बाद मोदी सरकार 2.0 का पहला पूर्ण आम बजट आज संसद में पेश हो रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 11 बजे लोकसभा के पटल पर आने वाले वित्त वर्ष के लिए सरकार का बजट पेश किया। इसमें गांव, गरीब, किसान, व्यापारियों समेत कईं बड़े ऐलान हुए।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि 400 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाली कंपनियों को 25 फीसदी कॉरपोरेट टैक्स देना होगा। इसके तहत देश की 99 फीसदी कंपनी आ जाएंगी। ई वाहनों पर GST को 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया जाएगा, इसके साथ ही स्टार्टअप के लिए बड़ी छूट का ऐलान किया है। स्टार्ट अप को एंजल टैक्स नहीं देना होगा, साथ ही आयकर विभाग भी इनकी जांच नहीं करेगा।

मिडिल क्लास के लिए मोदी सरकार ने बड़ा ऐलान किया है कि अब 45 लाख रुपए का घर खरीदने पर अतिरिक्त 1.5 लाख रुपए की छूट दी जाएगी। इसके अलावा 2.5 लाख रुपये तक का इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने पर भी छूट दी जाएगी।

सीतारमण ने कहा कि भारत की जनता ने जनादेश के माध्यम से हमारे देश के भविष्य के लिए अपने दो लक्ष्यों- राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक वृद्धि पर मुहर लगाई है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि हमारा उद्देश्य है, मजबूत देश के लिए मजबूत नागरिक।

इतना ही नहीं, वित्त मंत्री का कहना है कि आगामी पांच सालों में भारत की इकोनॉमी पांच ट्रिलियन डॉलर की होगी। वहीं इसी साल भारत तीन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगी। आगामी वर्षों में सरकार द्वारा और फेसिलिटेशन सेंटर खोले जाएंगे।

इस बजट से पहले वित्त मंत्री ने मंजूर हाशमी शेर भी सुनाया और फिर उन्होंने बजट पेश करना शुरु किया। उन्‍होंने कहा, ‘यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है’।

वित्‍तमंत्री ने जो शेर सुनाया, वह मंज़ूर हाशमी की एक ग़ज़ल का हिस्‍सा है। पूरी ग़ज़ल कुछ इस तरह है।

“यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है, हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है

सफ़र में अब के ये तुम थे कि ख़ुश-गुमानी थी, यही लगा कि कोई साथ साथ चलता है

ग़िलाफ़-ए-गुल में कभी चाँदनी के पर्दे में, सुना है भेस बदल कर भी वो निकलता है

लिखूँ वो नाम तो काग़ज़ पे फूल खिलते हैं, करूँ ख़याल तो पैकर किसी का ढलता है

रवाँ-दवाँ है उधर ही तमाम ख़ल्क़-ए-ख़ुदा, वो ख़ुश-ख़िराम जिधर सैर को निकलता है

उम्मीद ओ यास की रुत आती जाती रहती है, मगर यक़ीन का मौसम नहीं बदलता है”

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