बिहार बोर्ड ने पास लड़की को किया फेल, हाईकोर्ट ने जब जांच कराई कॉपियां तो निकली टॉपर

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 22-10-2017 / 4:26 PM
  • Update Date: 22-10-2017 / 4:26 PM

पटना। बिहार के सहरसा जिले के छोटे से गांव सिटानाबाद की मेधावी छात्रा प्रियंका न सिर्फ पढ़ाई में होशियार है, बल्कि अपनी जिद की पक्की भी। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने उसे दसवीं में फेल कर दिया। तो उसने मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी, अब जाकर पता चला है कि प्रियंका ने टॉप 10 में स्थान हासिल किया है।

प्रियंका के लिए यह सब करना इतना आसान नहीं था। खुद को फेल घोषित होने के बावजूद उसने हार नहीं मानी। पहले तो उसने बिहार बोर्ड को ही कॉपी पुनरीक्षण के लिए आवेदन किया। बोर्ड की बेशर्मी ये कि प्रियंका को ‘नो चेंज’ की पर्ची थमाकर अंकों में बदलाव से इनकार कर दिया गया। इसके बावजूद प्रियंका हताश नहीं हुई। उन्होंने अपने अभिभावकों को अपने खिलाफ हुई नाइंसाफी से लड़ने के लिए राजी किया।

सराहना तो प्रियंका के माता-पिता की भी होनी चाहिए, जिन्होंने अपनी बेटी पर भरोसा किया और मामला पटना हाईकोर्ट तक ले गए। उच्च न्यायालय में अदालत के पूछने पर बिहार बोर्ड ने प्रियंका के दावे को झुठलाने की भरसक प्रयास की। यहां तक कहा गया कि प्रियंका बेवजह कोर्ट और बोर्ड का समय बर्बाद कर रही है। प्रियंका के वकील ने गुहार लगाई कि अगर वो वाकई फेल है तो उसकी कॉपी कोर्ट में पेश की जाए।

कोर्ट के आदेश और 40 हजार रुपया जमानत के तौर पर जमा करने के बाद प्रियंका की आंसर शीट कोर्ट में लाई गई। कोर्ट रूम में बैठी प्रियंका तब हतप्रभ रह गईं जब उन्होंने पाया कि उनकी आंसर शीट ही बदल दी गई है। संस्कृत और विज्ञान की उत्तर पुस्तिका की हैंडराइटिंग मेल नहीं खा रही थी। प्रियंका के दावों पर तत्काल कोर्ट ने उसके हैंडराइटिंग सैंपल लिए और मामला शीशे की तरह साफ हो गया। प्राप्त अंकों के आधार पर प्रियंका को टॉप 10 के भीतर टॉपर घोषित किया गया।

साथ ही पटना हाईकोर्ट ने बिहार बोर्ड को जमकर फटकार लगाई। कोर्ट ने बिहार बोर्ड पर पांच लाख का जुर्माना भी लगाया है। साथ ही अन्य उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। बिहार बोर्ड द्वारा घोषित परीक्षा परिणाम लापरवाही की वजह से अमूमन विवादित रहती है।

कई बार तो अयोग्य छात्रों को टॉपर बनाया गया। ये संभवत: पहला मामला है जब किसी मेधावी छात्रा को फेल कर दिया गया हो। इस आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि प्रियंका जैसे कई अन्य छात्र होंगे जो बोर्ड की नाइंसाफी और लापरवाही का शिकार हुए हों।

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