शुक्रवार को करें इस विधि से मां लक्ष्मी जी की पूजा-आरती, घर में कभी नहीं होती धन की कमी

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 12-07-2019 / 2:39 PM
  • Update Date: 12-07-2019 / 2:39 PM

श्री महालक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी हैं। ये भगवान विष्णु की पत्नी हैं। ये समुद्र मंथन के दौरान प्रकट हुई थीं। लक्ष्मी जी ने खुद ही भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में चुना। ये क्षीर सागर में भगवान विष्णु के साथ निवास करती हैं। महालक्ष्मी को श्री के रूप में भी जाना जाता है। इनकी पूजा से धन, सुख, समृद्धि और शांति मिलती है।

लक्ष्मी पूजा प्रतिदिन की जानी चाहिए-

देवी लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए शुक्रवार के दिन माता वैभव लक्ष्मी का व्रत करने से भी सुख समृद्धि प्राप्त करते हैं। इस दिन लक्ष्मी की पूजा-अर्चना करते हुए श्वेत पुष्प, कमल , श्वेत चंदन को अर्पित करना चाहिए। चावल और खीर का प्रसाद बनाकर भगवान को भोग लगाकर प्रसाद को सभी में तथा स्वयं ग्रहण करते हैं व्रत के दिन उपासक को एक समय भोजन करना होता है इस व्रत को नियमित रूप से 11 या 21 शुक्रवारों तक करना चाहिए। लक्ष्मी की उपासना से सुख-समृद्धि, सौभाग्य, ऐश्वर्य प्राप्त होता है।

सत, रज और तम रूपा तीन शक्तियों में से एक हैं देवी लक्ष्मी जी-

देवी लक्ष्मी जी को धन-सम्पत्ति की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है। लक्ष्मी जी जिस पर भी अपनी कृपा दृष्टि डालतीं हैं वह दरिद्र, दुर्बल, कृपण, के रूपों से मुक्त हो जाता है। समस्त देवी शक्तियाँ के मूल में लक्ष्मी ही हैं जो सर्वोत्कृष्ट पराशक्ति हैं। समस्त धन संपदा की अधिष्ठात्री देवी कोमलता की प्रतीक हैं, लक्ष्मी परमात्मा की एक शक्ति हैं वह सत, रज और तम रूपा तीन शक्तियों में से एक हैं।

देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होने के बाद भक्त को कभी धन की कमी नहीं होती देवी लक्ष्मी चल एवं अचल संपत्ति प्रदान करने वाली हैं । लक्ष्मीजी के विधिवत पूजन से हमारे सभी कष्ट दूर हो जाते हैं पूजन एवं मंत्रों उच्चारण द्वार पूजा करें “ऊँ महालक्ष्म्यै नम:” मंत्र जप के साथ पूजन करें।

दरिद्रता को दूर करने में सहायक होती है लक्ष्मी की पूजा-

हिन्दू शास्त्रों में देवी लक्ष्मी जी के स्वरुप को अत्यंत सुंदर और प्रभावि रुप से दर्शाया गया है। शुक्रवार को देवी लक्ष्मी की पूजा, दरिद्रता को दूर करने में सहायक होती है। माता लक्ष्मी की उपासना का विशेष महत्व है देवी लक्ष्मी को वैभव की अधिष्ठात्री देवी कहा जाता है।

जीवन में धन की दिक्कत, नौकरी या व्यवसाय में असफलता या खर्चों से आर्थिक तंगी से परेशान होने पर देवी लक्ष्मी की विशेष मंत्र से उपासना द्वारा माता लक्ष्मी की कृपा को प्राप्त किया जा सकता है।

स्नान के बाद एक चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर देवी लक्ष्मी की यथा संभव चांदी की प्रतिमा को स्थापित करके प्रतिमा को कच्चे दूध व गंगाजल से स्नान कराना चाहिए। इसके पश्चात देवी जी को अक्षत, फूल, लाल चंदन, अर्पण करना चाहिए तथा लक्ष्मी मंत्र का स्मरण कर आर्थिक सुख समृद्धि की कामना करनी चाहिए।

लक्ष्मी पूजा मंत्र-

“ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः।” अथवा “ॐ ह्री श्रीं क्रीं श्रीं क्रीं क्लीं श्रीं महालक्ष्मी मम गृहे धनं पूरय पूरय चिंतायै दूरय दूरय स्वाहा ।”

साफ आसन ग्रहण कर माला द्वारा 108 बार मंत्र जाप पूर्ण कर अपने कार्य उद्देश्य कि पूर्ति हेतु मां लक्ष्मी से प्रार्थना करनी चाहिए। विधि विधान द्वारा मंत्र पूजन करने से मां लक्ष्मी कि कृपा से व्यक्ति को धन धान्य की की प्राप्ति होती है। वैभव लक्ष्मी की साधना शुक्रवार को बहुत ही शुभ मानी जाती है। देवी मंत्र के साथ ही श्रीसूक्त का पाठ भी करें।

कैसे करें आरती –

लक्ष्मी जी की आरती में 16 पंक्तियां हैं। शक्ति तत्व की देवी होने से इन पंक्तियों को ऊंची राग के साथ मध्यम स्वर और मध्यम वेग में गाया जाना चाहिए। इस बात का ध्यान रहे कि आरती का उच्चारण शुद्ध होना चाहिए। राजसिक शक्ति होने के कारण लक्ष्मी जी की आरती में मधुर स्वर उत्पन्न करने वाले वाद्य यंत्र बजाने चाहिए। इन यंत्रों को हल्के हाथ से बजाएं ताकि मधुर ध्वनि उत्पन्न हो।

आरती के लिए शुद्ध कपास यानी रूई से बनी घी की बत्ती होनी चाहिए। तेल की बत्ती का उपयोग करने से बचना चाहिए। कपूर आरती भी की जाती है। बत्तियाें की संख्या एक, पांच, नौ, ग्यारह या इक्किस हो सकती है। आरती घड़ी के कांटो की दिशा में लयबद्ध तरीके से करनी चाहिए।

आरती करने से पहले ये मंत्र बोलें –

या श्री: स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मी:
पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धि:।
श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा
तां त्वां नता: स्म परिपालय देवि विश्वम्॥

अर्थ – जो पुण्यात्माओं के घरों में स्वयं ही लक्ष्मीरूप से, पापियों के यहाँ दरिद्रतारूप से, शुद्ध अन्त:करणवाले पुरुषों के हृदय में बुद्धिरूप से, सत्पुरुषों में श्रद्धारूप से तथा कुलीन मनुष्य में लज्जारूप से निवास करती हैं, उन महालक्ष्मी को हम नमस्कार करते हैं। देवि! आप सम्पूर्ण विश्व का पालन कीजिये।

लक्ष्मी जी की आरती –
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ॐ जय लक्ष्मी माता॥

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