धारणाओं और विश्वासों को बदलने के लिए आपको चर्चा छेड़नी पड़ेगी!

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 07-11-2020 / 12:51 PM
  • Update Date: 07-11-2020 / 12:51 PM

ब्लॉकबस्टर ‘बाला’ की पहली वर्षगांठ पर आयुष्मान खुराना बता रहे हैं कि अपनी फिल्मों के जरिए वह किस तरह से समाज के बारे में बहस शुरू करना चाहते है

बॉलीवुड स्टार आयुष्मान खुराना अपनी अनोखी, क्लटर-ब्रेकिंग, चर्चा शुरू करने वाली ऐसी सोशल इंटरटेनर फिल्मों के लिए जाने जाते हैं, जो समाज के अंदर गहराई तक धंसी समस्याओं और वर्जनाओं को आईना दिखाती हैं। टाइम मैगजीन द्वारा दुनिया के सबसे प्रभावशाली लोगों में शामिल किए गए इस थॉट लीडर ने बड़ी खूबसूरती से गंभीर और जोखिम भरे नाजुक मुद्दों को सहज बना दिया है। ऐसे मुद्दों में ‘शुभ मंगल ज़्यादा सावधान’ वाली सेम-सेक्स रिलेशनशिप शामिल है।

’आर्टिकल 15’ में उन्होंने कास्ट पॉलिटिक्स के बारे में आवाज बुलंद की। ‘ड्रीम गर्ल’ में वह लैंगिक शिथिलता को लेकर खुलेपन की वकालत करते दिखे। ‘बाला’ के जरिए उन्होंने पुरुषों के समय से पहले गंजा हो जाने तथा भारत में सांवले और काले लोगों से जुड़े टैबू को लेकर चर्चा की। ब्लॉकबस्टर ‘बाला’ की पहली वर्षगांठ पर आयुष्मान सोशल इंटरटेनर फिल्मों से जुड़े अपने इरादे का खुलासा कर रहे हैं, जिनको अब प्यार से ‘द आयुष्मान खुराना जॉनर’ की फिल्में कहा जाता है!

वह कहते हैं, “जब आप लोगों की धारणाओं और विश्वासों को बदलने निकलते हैं तो आपको उनसे संवाद शुरू करना पड़ता है, कोई बहस छेड़नी पड़ती है। मेरा पुख्ता यकीन है कि रचनात्मक बातचीत व्यापक रूप से समाज को बेहतर बनाने में हमारी बड़ी मददगार सिद्ध हो सकती है। मेरी फिल्मों ने ठीक यही करने की कोशिश की है और अब तक मैंने जो भी काम किया है, उस पर मुझे गर्व है।“

इस वर्सेटाइल एक्टर का कहना है कि ‘बाला’ एक ऐसी फिल्म थी, जो निजी शख्सियत और अनूठेपन का झंडा बुलंद करने का इरादा रखती थी। वह बताते हैं, “बाला के सहारे मैं इस फैक्ट को सहज बनाना चाहता था कि परफेक्शन मनुष्यों का बनाया हुआ एक मिथ है और यह इतने गहरे भेदभाव पैदा करता है, जो दिलों तथा परिवारों को तोड़ देते हैं। इस फिल्म के माध्यम से मैं लोगों को समझाना चाहता था कि वे खुद को प्यार करें, हर व्यक्ति अपने आपमें बेहद खास और अनोखा होता है। मैं प्रत्येक व्यक्ति से कहना चाहता था कि वे खूबसूरती के स्टीरियोटाइप खयाल के जाल में न फंसें, क्योंकि इसने लोगों को बांट दिया है। मैंने लोगों को यह बताने की कोशिश की थी कि इस सो-कॉल्ड परफेक्शन के पीछे भागना कितना नुकसानदायक हो सकता है। मैं खुश था, कि दर्शकों ने हमारी फिल्म पर बहुत प्यार बरसाया।“

आयुष्मान ‘बाला’ के डाइरेक्टर अमर कौशिक तथा प्रोड्यूसर दिनेश विजन की तारीफ करते नहीं थकते! उनको लगता है कि फिल्म की टीम समाज में सकारात्मक बदलाव लाने को लेकर प्रतिबद्ध थी। वह कहते हैं-, “मुझे अपने डाइरेक्टर अमर कौशिक को एक सच्ची क्लटर-ब्रेकिंग फिल्म बनाने के लिए अपना शानदार और संवेदनशील विजन सामने लाने का श्रेय देना ही पड़ेगा, जो फिल्म में गुंथे सोशल सटायर के चलते एक बेहद इंटरटेनिंग फिल्म भी थी। मैं अपने प्रोड्यूसर दिनेश विजन का भी शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने एक ऐसे कंटेंट का साथ देने की ठानी थी, जो एकदम हट कर था। ‘बाला’ एक साहसी फिल्म थी और इसे दिनेश जैसे इरादों के पक्के प्रोड्यूसर के बिना बनाना संभव ही नहीं था।“

यह स्टार अच्छी तरह से समझता है कि टैबू से जुड़े विषयों के बारे में चर्चा को सहज बनाने हेतु ऐसे विषयों को ज्यादा से ज्यादा सामने लाने के लिए उसे अपनी आवाज बुलंद करनी पड़ेगी। आयुष्मान को लगता है कि ऐसा होने से ज्यादा प्रगतिशील समाज बनेगा। उनकी राय है- “फिल्में समाज का सच्चा दर्पण बन सकती हैं और अपनी फिल्मों के माध्यम से मैं समाज का ध्यान खींचने वाले जरूरी मामलों को केंद्र में लाने की लगातार कोशिश करता हूं। मैं मान कर चलता हूं कि मुद्दों को सहज बनाने में अपना योगदान दे सकता हूं और लोगों से अपनी दुनिया के बारे में बनाई गई पूर्वाग्रही राय पर फिर से विचार करने का आवाहन कर सकता हूं। मेरा जितना वश चलेगा मैं ज्यादा से ज्यादा स्टीरियोटाइप तोड़ देना चाहूंगा और इस दिशा में अभी बहुत काम किया जाना बाकी है।“

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