मृत्यु जीवन का एक अटल सत्य है, फिर भी हम यह स्वीकारने में हिचकिचाते हैं

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 11-03-2019 / 8:58 PM
  • Update Date: 11-03-2019 / 8:58 PM

यारों दुनिया में सभी अपने जीवन से बहुत प्यार करते हैं। दुनिया में कोई भी मरना नहीं चाहता है सबको अपना जीवन बहुत प्रिय होता है। इसलिए दोस्तों सभी मौत के नाम से डरते हैं पर इससे डरने से कुछ नहीं होता है मृत्यु सत्य है उसका आना भभी अटल है जो इस धरती पर आया है उसे निश्चित समय पर जाना है जाना कब है यह सिर्फ हमें भेजने वाला जानता है इसमें हम कुछ नहीं कर सकते मृत्यु एक अटल सत्य है।

जन्म लेते ही मरण तय हो जाता है परन्तु फिर भी सब यह स्वीकारने में हिचकिचाते हैं। मृत्यु मंज़िल है और जीवन मात्र मृत्यु तक का सफ़र है। सोचने का विषय तो यह भी है की मृत्यु कब और किस रूप में आएगी यह भी किसी को नहीं पता होता है परन्तु फिर भी सब अपने भविष्य की तैयारी में जुटे होते हैं और देखा जाए तो यह अच्छा ही है क्यों की डर डर कर जीवन व्यतीत करने से बेहतर मृत्यु की सोचे बिना अपना कार्य करने और जीवन की खूबसूरती महसूस करने में है।

महात्मा बुद्ध के समय की बात है। उन दिनों मृत्यु के बाद आत्मा को स्वर्ग में प्रवेश कराने के लिए पंडित कुछ विशेष कर्म कांड करवाते थे। इसके बदले पंडित जमकर दान-दक्षिणा लेते। लोग अपने मृत परिजनों को स्वर्ग में स्थान दिलाने के लिए पंडितों की हर बात मानते थे। एक दिन गांव में एक वृद्ध पुरुष की मृत्यु हो गई। उसके बेटे ने सोचा क्यों न पिताजी की आत्मा को स्वर्ग में स्थान दिलाने के लिए महात्मा बुद्ध की मदद ली जाए। वो युवक बुद्ध के पास गया और बोला- कृपया कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मेरे पिताजी की आत्मा को स्वर्ग में स्थान मिल सके।

बुद्ध ने कहा- तुम दो मिट्‌टी के घड़े लेना, एक में पत्थर और दूसरे में घी भर देना। दोनों घड़ों को ले जाकर नदी के बीच में हथौड़ी से उन्हें फोड़ देना। इसके बाद क्या हुआ, मुझे आकर बताना। युवक को बुद्ध की बात समझ तो नहीं आई, लेकिन उसने वैसा ही किया, जैसा उन्होंने बताया था। अगले दिन उसने बुद्ध को बताया कि- पत्थर और घी से भरे घड़ों को नदी में ले जाकर में मैंने चोट की। पत्थर वाले घड़े पर प्रहार किया तो वो टूट गया और पत्थर पानी में डूब गए। घी वाले घड़े पर वार किया तो वह भी फूट गया और घी नदी के बहाव की दिशा में बहने लगा।

बुद्ध ने कहा- क्या किसी भी मंत्र या कर्मकांड से ऐसा हो सकता है कि वे पत्थर पानी के ऊपर तैरने लगें और घी नदी की सतह पर जाकर बैठ जाए। युवक ने कहा, ऐसा तो किसी भी तरह से संभव नहीं है। न तो पत्थर पानी पर तैर सकते हैं और न ही घी नदी के तल में जाकर बैठ सकता है। बुद्ध बोले, ठीक ऐसा ही तुम्हारे पिताजी के साथ है। उन्होंने जो भी अच्छे कर्म किये हैं वो उन्हें स्वर्ग की तरफ उठाएंगे और जो भी बुरे कर्म किये हैं वे उन्हें नरक की ओर खीचेंगे। तुम चाहे जितनी भी पूजा करा लो, तुम उनके कर्मफल को रत्ती भर भी नहीं बदल सकते।

दोस्तों इसी प्रकार हम सभी को इस सच को स्वीकार करना चाहिये कि मृत्यु एक अटल सत्य हैं उसे नकारना मुर्खता हैं। दुख होता हैं लेकिन उसमे फँस जाना गलत हैं क्यूंकि केवल आप ही उस दुख से पिढीत नहीं हैं। अपितु सम्पूर्ण मानव जाति उस दुख से रूबरू होती ही हैं। ऐसे सच को स्वीकार कर आगे बढ़ना ही जीवन हैं।

कई बार हम अपने किसी खास के चले जाने से इतने बेबस हो जाते हैं कि सामने खड़ा जीवन और उससे जुड़े लोग हमें दिखाई ही नहीं पड़ते। ऐसे अंधकार से निकलना मुश्किल हो जाता हैं। जो मनुष्य मृत्यु के सत्य को स्वीकार कर लेता हैं उसका जीवन भार विहीन हो जाता हैं और उसे कभी कोई कष्ट तोड़ नहीं सकता। वो जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ता जाता हैं।

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