छत्तीसगढ़: जमानत या पेरोल पर रिहा किए जाएंगे कैदी

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 30-03-2020 / 6:43 PM
  • Update Date: 30-03-2020 / 6:43 PM

रायपुर। देश भर में कोरोना का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। देश में कोरोनावायरस के संक्रमण के 900 से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। वहीं छत्तीसगढ़ की जेलों से करीब दो हजार बंदी जमानत या पेरोल पर रिहा किए जाएंगे। यह फैसला गुरुवार को राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की टेली कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों के साथ हुई बैठक में लिया गया है।

जानकारी के मुताबिक कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखकर छत्तीसगढ़ की जेलों में बंद कैदियों की कोरोना वायरस से सुरक्षा के इंतजामों पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे की अगुवाई वाली बेंच ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर एक कमेटी बनाने के निर्देश दिए थे। ये कमेटी जेल की भीड़ कम करने पर काम कर रही है।

पत्र में राज्यों से ये निर्धारित करने को कहा गया है कि किस वर्ग के कैदियों, दोषियों को और अंडरट्रायल्स (विचाराधीन) कैदियों को रिहा किया जा सकता है या किसे जमानत या पेरोल दी जा सकती है। इसके अलावा रिमांड होम में रह रहे जुवेनाइल कैदियों को रिहा करने को लेकर भी सुझाव देने को कहा यानी कोर्ट ने जेल, रिमांड होम में कोरोना वायरस के खतरे को रोकने के लिए राज्य सरकार से सुझाव मांगा था।

जेल विभाग के सूत्रों ने बताया कि रायपुर समेत बिलासपुर, जगदलपुर, दुर्ग, अंबिकापुर सेंट्रल जेल समेत जिला जेलों में करीब दो हजार ऐसे कैदी हैं, जो सात साल की सजा पूरी कर चुके हैं। ऐसे कैदियों को जमानत या पेरोल पर रिहा करने का रास्ता साफ हो गया है। तिहाड़ जेल दिल्ली के बाद छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य बन गया है जहां ऐसा फैसला लिया गया है।

टेली कांफ्रेंसिंग में राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त मुख्य सचिव सुब्रत साहू, जेल विभाग के प्रमुख सचिव एमके चंद्रवंशी और जेल विभाग के अतिरिक्त महानिदेशक संजय पिल्ले शामिल थे। बैठक में बताया गया कि प्रदेश की जेलों में बंद ऐसे कैदी जिनको किसी मामले में अधिकतम सात साल की सजा हो सकती है या दी गई है उन्हें कुछ शर्तों के साथ जेलों से रिहा किया जाएगा।

ऐसे बंदी जिनके मामले की सुनवाई चल रही हो उन्हें 30 अप्रैल तक की निजी मुचलके पर अंतरिम जमानत दे दी जायेगी। ऐसे बंदी जिन्हें सात साल तक की सजा सुनाई जा चुकी है और जेल में तीन माह या उससे अधिक की अवधि व्यतीत कर चुके हों उन्हें 30 अप्रैल तक पैरोल पर छोड़ा जायेगा।

अफसरों के मुताबिक ऐसे बंदियों की संख्या करीब दो हजार है। इन बंदियों को अपना आवेदन अपने जिलों के विधिक सेवा प्राधिकरण में जिला जज की ओर से नियुक्त किए गए विशेष जजों के समक्ष प्रस्तुत करना होगा, इसके बाद निजी मुचलके पर कैदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाएगा।

जिला न्यायालय रायपुर ने करीब 90 विचाराधीन बंदियों के रिहाई के आदेश शुक्रवार को जारी कर दिया है। जिला विधिक सेवा प्राधीकरण के सचिव उमेश उपाध्याय ने बताया कि सभी बंदियों को जमानत आवेदन और बंध पत्र उपलब्ध करा दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामकुमार तिवारी ने स्वंय न्यायालय में उपस्थित रहकर यह कार्रवाई पूरी की।

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