उगते सूर्य को अर्घ्य देकर संपन्न हुआ छठ पूजा का महापर्व

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 21-11-2020 / 9:23 AM
  • Update Date: 21-11-2020 / 9:23 AM

नई दिल्ली। बिहार और झारखंड का सबसे बड़ा महापर्व छठ पूरे देश में बेहद धूमधाम के साथ मनाया जाता है। कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के चतुर्थी से सप्तमी तिथि तक चलने वाला चार दिन का ये पर्व आज उगते सूर्य को अर्घ्य देने के बाद संपन्न हो गया।

इससे पहले शुक्रवार को महिलाओं ने अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्‍य देकर धूमधाम से पूजा अर्चना की थी। शाम चार बजे से ही नदी व पोखरों पर महिलाएं पूजा के लिए पहुंच गईं और शाम ढलने के बाद सूर्य को अर्घ्‍य देकर ही लौटीं। छठ पर्व को लेकर शहर से गांव तक धूम रही।

छठ व्रतियों ने शुक्रवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया, वहीं शनिवार की सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया। राजधानी दिल्ली में छठ घाट पर व्रतियों के अलावा परिवार के सदस्यों की भीड़ उमड़ी रही। इस दौरान बच्चों में काफी उत्साह देखा गया।

छठ घाट पर छोटे-छोटे बच्चे जहां पटाखे फोड़ रहे थे, वहीं, महिलाएं छठ गीत गा रही थी, इससे पूरी तरह छठमय बना रहा। कई परिवार ने गाजे-बाजे के साथ सूर्य को अर्घ्‍य देकर परिवार की सलामती की कामना की। इस दौरान सभी जगहों पर कांच ही बांस के बहंगिया, बहंगी लचकत जाए जैसे छठ गीतों की धूम रही।

गौरतलब है कि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से सप्तमी की तिथि तक भगवान सूर्यदेव की अटल आस्था का पर्व छठ पूजा मनाया जाता है। नहाय खाय के साथ ही लोक आस्था का महापर्व छठ की शुरुआत हो जाती है। चार दिन तक चलने वाले इस आस्था के महापर्व को मन्नतों का पर्व भी कहा जाता है।

इसके महत्व का इसी बात से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इसमें किसी गलती के लिए कोई जगह नहीं होती। इसलिए शुद्धता और सफाई के साथ तन और मन से भी इस पर्व में जबरदस्त शुद्धता का ख्याल रखा जाता है। अर्घ्य के दौरान डूबते और उगते सूर्य को आटे से बने पकवान, दूध, गन्ना, केला और नारियल का भोग लगाते हैं।

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