चंद्रयान-2 हुआ लॉन्च, पीएम मोदी बोले- देश के गौरवशाली इतिहास का सबसे खास पल

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 22-07-2019 / 6:44 PM
  • Update Date: 22-07-2019 / 6:44 PM

नई दिल्ली। अंतरिक्ष की दुनिया में भारत ने आज एक बार फिर इतिहास रच दिया है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन यानी ISRO ने सोमवार दोपहर 2.43 मिनट पर सफलतापूर्वक चंद्रयान-2 को लॉन्च किया। चांद पर कदम रखने वाला ये भारत का दूसरा सबसे बड़ा मिशन है। लॉन्चिंग के बाद धरती की अंडाकार कक्षा में स्थापित होने के बाद चंद्रयान-2 को बार-बार छोटे-छोटे रॉकेट लॉन्च कर कक्षा को बढ़ाया जाएगा। यह प्रक्रिया 23 दिनों तक चलेगी।

भारत की ऐतिहासिक यात्रा
इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने कहा, ये ऐलान कर बहुत खुश हूं कि जीएसएलवी-3 ने चंद्रयान-2 को धरती से 6 हजार किमी दूर कक्षा में स्थापित कर दिया है। ये हमारी ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत है। यान चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर पहुंचेगा। सभी तकनीकी गड़बड़ियों का पता लगाकर सुलझा लिया गया था। अगले डेढ दिन में जरूरी टेस्ट किए जाएंगे, जिससे तय होगा कि मिशन सही दिशा में है।

गौरवशाली इतिहास का खास पल
चंद्रयान-2 लॉन्चिंग पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह देश के गौरवशाली इतिहास का सबसे खास पल बनेगा। यान की कामयाब लॉन्चिंग वैज्ञानिकों की अथक मेहनत और 130 भारतीयों की इच्छाशक्ति के कारण हुई। यह विज्ञान के नए आयाम खोलेगा। आज हर भारतीय गर्व महसूस कर रहा होगा।

48 दिन की यात्रा के विभिन्न पड़ाव
चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान 22 जुलाई से लेकर 13 अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चक्कर लगाएगा, जिसके बाद 13 अगस्त से 19 अगस्त तक चांद की तरफ जाने वाली लंबी कक्षा में यात्रा करेगा। 19 अगस्त को ही यह चांद की कक्षा में पहुंचेगा। 13 दिन बाद (31 अगस्त) तक वह चांद के चारों तरफ चक्कर लगाएगा।

फिर 1 सितंबर को विक्रम लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा और चांद के दक्षिणी ध्रुव की तरफ यात्रा शुरू करेगा। 5 दिन की यात्रा के बाद 6 सितंबर को विक्रम लैंडर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर लैंड करेगा। लैंडिंग के करीब 4 घंटे बाद रोवर प्रज्ञान लैंडर से निकलकर चांद की सतह पर विभिन्न प्रयोग करने के लिए उतरेगा।

बता दें चांद के इस भाग में अभी तक कोई देश नहीं उतर पाया है। इसरो के मुताबिक, चंद्रयान-2 चांद के भौगोलिक वातावरण, खनिजों, तत्वों, उसके वायुमंडल के बाहरी परत और पानी के बारे में जानकारी एकत्र करेगा। स्वदेशी तकनीक से निर्मित चंद्रयान-2 में कुल 13 पेलोड हैं। आठ ऑर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर ‘विक्रम’ और दो पेलोड रोवर ‘प्रज्ञान’ में हैं। पांच पेलोड भारत के, तीन यूरोप, दो अमेरिका और एक बुल्गारिया के हैं।

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