छत्तीसगढ़

खाद्यान्न सुरक्षा के लिए जैविक खेती करना जरूरी

कुरुक्षेत्र। भारत के गांवों में अब जैविक खेती की हवा चल रही है। यह किसानों के लिए काफी नया प्रयोग है, लेकिन वे उत्साहित हैं। जैविक खेती से जहां खाद्यान्न का भरपूर उत्पादन हो रहा है वहीं मिट्टी की उर्वरा-शक्ति भी बच रही है। वायु एवं जल प्रदूषण कम हो रहा है और किसानों को …

जैविक खेती से भूमि की उर्वरा शक्ति को बचाये

संपूर्ण विश्व में बढ़ती हुई जनसंख्या एक गंभीर समस्या है, बढ़ती हुई जनसंख्या के साथ भोजन की आपूर्ति के लिए मानव द्वारा खाद्य उत्पादन की होड़ में अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए तरह-तरह की रासायनिक खादों, जहरीले कीटनाशकों का उपयोग, प्रकृति के जैविक और अजैविक पदार्थों के बीच आदान-प्रदान के चक्र को …

खेती उत्पादन को बढ़ाएँ व लागत खर्च को कम करें

खेती को लाभदायक बनाने के लिए दो ही उपाय हैं- उत्पादन को बढ़ाएँ व लागत खर्च को कम करें। कृषि में लगने वाले मुख्य आदान हैं बीज, पौध पोषण के लिए उर्वरक व पौध संरक्षण, रसायन और सिंचाई। खेत की तैयारी, फसल काल में निंदाई-गुड़ाई, सिंचाई व फसल की कटाई-गहाई-उड़ावनी आदि कृषि कार्यों में लगने …

कृषि उत्पादन वृध्दि में बीज की अहम भूमिका

कृषि उत्पादन वृध्दि में बीज सर्वाधिक अहम भूमिका रखता है ।अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों से उत्पादकता बीस से तीन प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है । प्रदेश में बीज प्रतिस्थापन दर लगभग 2 से 5 प्रतिशत है, जिसे आगामी दस वर्षो में 4 से 20 प्रतिशत तक किये …

रोटावेटर से उखड़वाना पड़ी सोयाबीन फसल

मूंदी सहित पुनासा तहसील के किसान सोयाबीन फसल बिगड़ने से मुश्किल में फंस गए हैं। कई किसानों को लागत निकालना मुश्किल हो गया। कुछ ऐसे अभागे किसान भी मिले जिनके खेत में सोयाबीन का पौधा तो पनपा लेकिन प्राकृतिक आपदा के कारण गिनी चुनी फल्लियां लगी। परिणाम यह रहा कि मुफ्त में फसल निकालकर ले …

किसान क्रेडिट कार्ड योजना का उद्देश्य आर्थिक सहायता

किसान क्रेडिट कार्ड योजना का उद्देश्य बैंकिंग व्यवस्था से किसानों को समुचित और यथासमय सरल एवं आसान तरीके से आर्थिक सहायता दिलाना है ताकि खेती एवं जरूरी उपकरणों की खरीद के लिए उनके वित्तीय आवश्यकताओं की पूर्ति हो सके। किसान क्रेडिट कार्ड योजना के लाभ – सरल वितरण प्रक्रिया -नकद आपूर्ति के लिए बहुत ही …

पानीदार बुन्देलखण्ड, आषाढ़ में जो बरसा बस वही…

आषाढ़ में जो बरसा बस वही था, लगभग पूरा सावन-भादो निकल गया है और जो छिटपुट बारिश हुई है, उससे बुन्देलखण्ड फिर से अकाल-सूखा की ओर जाता दिख रहा है। यहाँ सामान्य बारिश का तीस फीसदी भी नहीं बरसा, तीन-चौथाई खेत बुवाई से ही रह गए और कोई पैंतीस फीसदी ग्रामीण अपनी पोटलियाँ लेकर दिल्ली-पंजाब …

चावल उत्पादन में गहनीकरण पद्धति

भारत में धान महत्त्वपूर्ण खाद्यान्न फसल है। राष्ट्रीय-स्तर पर धान की खेती करीब 4.5 करोड़ हेक्टेयर में की जाती है। कृषि वैज्ञानिकों की ओर से चावल उत्पादन में चावल गहनीकरण पद्धति यानी एसआरआई (श्री) अपनाई जा रही है। श्री खेती के अन्तर्गत जलभराव होने पर धान जलमग्न नहीं होता है लेकिन वानस्पतिक अवस्था के दौरान …

जलग्रहण क्षेत्र संरक्षण में केन्द्र का योगदान

जलग्रहण क्षेत्र में भूमि संरक्षण के लिए केन्द्र प्रायोजित योजना तीसरी पंचवर्षीय योजना में शुरू की गई थी। इसके पश्चात 1978 में बाढ़ की विभीषिका को ध्यान में रखते हुए छठी पंचवर्षीय योजना में बाढ़ सम्भावित नदी योजना की शुरूआत की गयी थी। इन दोनों योजनाओं का नौवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान व्यय वित्त समिति …

देश में जल प्रबन्धन से बढ़ता कृषि उत्पादन

देश में बड़ी संख्या में कृषि योग्य भूमि बाढ़ एवं जलभराव से प्रभावित है। करीब 60 फीसदी कृषि भूमि वर्षा पर आधारित है। मानसून की सक्रियता कहीं कम तो कहीं ज्यादा होने से बाढ़ व सूखे के हालात रहते हैं। बाढ़ के कारण कृषि योग्य भूमि प्रभावित होती है। इस भूमि को भी खेती योग्य …

28-02-18

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