जेपी इन्फ्राटेक को 2,000 करोड़ रुपए जमा करने होंगे

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 12-09-2017 / 2:01 PM
  • Update Date: 12-09-2017 / 2:01 PM

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनी जेपी इन्फ्राटेक को झटका देते हुए उसे 27 अक्टूबर तक न्यायालय में 2,000 करोड़ रुपए जमा कराने का निर्देश दिया। देश की सर्वोच्च अदालत ने जेपी के एमडी और दूसरे डायरेक्टरों को देश छोड़ने से मना कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलटी द्वारा गठित संस्था अंतरिम रेजॉलुशन प्रफेशनल्स (आईआरपी) को जेपी इन्फ्राटेक के प्रबंधन की जिम्मेदारी लेने को कहा।

साथ ही, उसने आईआरपी को फ्लैट खरीददारों और देनदारों के हितों की रक्षा के लिए 45 दिनों के भीतर एक सामाधान योजना सौंपने को भी कहा है। कोर्ट ने कहा, ‘हम होम बायर्स की दुर्दशा समझते हैं और यह इंसानों की बड़ी समस्या है। हम कंपनियों के हितों को लेकर चिंतित नहीं हैं, बल्कि हमें किश्ते चुका रहे मध्यवर्गीय घर खरीदारों की चिंता है।

सुप्रीम कोर्ट ने ये निर्देश चित्रा शर्मा समेत 23 अन्य फ्लैट बायर्स की ओर से दाखिल याचिका की सुनवाई के दौरान दिए। बैंक के 526 करोड़ रुपए बकाया जेपी के 35 हजार घर खरीदारों के सामने तब बड़ी समस्या खड़ी हो गई जब नैशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) ने 10 अगस्त को आईडीबीआई बैंक की उस याचिका को स्वीकार कर लिया जिसमें बैंक ने 526 करोड़ रुपये की बकाया राशि पर जेपी इन्फ्रा के खिलाफ इनसॉल्वंसी प्रक्रिया शुरू करने की मांग की गई थी।

जेपी इन्फ्राटेक सड़क निर्माण और रियल एस्टेट बिजनस की बड़ी कंपनी है। इसी ने दिल्ली से आगरा तक यमुना एक्सप्रेसवे का निर्माण किया था। अभी इस कंपनी पर करीब 8,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इसमें अकेले आईडीबीआई बैंक का 526 करोड़ रुपया है।

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