बैंक ग्राहकों के लिए बड़ा झटका – बंद होगी ये मुफ्त सेवा

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 11-10-2018 / 11:42 AM
  • Update Date: 11-10-2018 / 11:42 AM

नई दिल्ली। बैंकों द्वारा ग्राहकों को दी जाने वाली मुफ्त सेवाओं पर केंद्र सरकार ने 19 बैंकों से 15 हजार करोड़ रुपए का टैक्स मांगा है। सरकार ने बैंक द्वारा ग्राहकों को दी जा रही मिनिमम बैंलेंस रखने वाली सुविधा पर यह टैक्स लगाया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बैंकों को यह टैक्स देना पड़ता है तो वे मुफ्त सेवा बंद कर इस पर कुछ शुल्क लगा सकते हैं, इससे ग्राहकों पर बोझ बढ़ेगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नोटिस के अनुसार, टैक्स की गणना बैंक द्वारा मिनिमम बैलेंस न रखने पर वसूले जाने वाले जुर्माने के आधार पर तय की गई है। अगर 1000 रुपये का मिनिमम बैलेंस न रखने पर जुर्माना 100 रुपये है तो जुर्माने की रकम पर 18 फीसदी जीएसटी देना होगा। इस तरह मुफ्त सेवा की कीमत 100 रुपये तय की गई है।

वस्तु एवं सेवा कर खुफिया महानिदेशालय ने जून में भी तमाम बैंकों को नोटिस दिया था। तब सरकार ने कहा था कि इन सेवाओं पर कोई टैक्स नहीं बनता है, लेकिन इस ताजा नोटिस से यह मामला फिर उभर आया है। यह नोटिस बैंकों को एक माह पहले थमाया गया है।

सरकार ने बैंकों से पिछले पांच साल में इन सेवाओं पर टैक्स देनदारी का हिसाब लगाकर बैंकों से इसे चुकता करने को कहा है। इसमें ब्याज और जुर्माने को जोड़ दें तो कर देनदारी 35 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। रिपोर्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इसमें इसमें एचडीएफसी बैंक पर 6500 करोड़, आईसीआईसीआई पर 3500 और एक्सिस बैंक पर 2500 करोड़ की देनदारी बनती है, जो ब्याज और जुर्माने को छोड़कर है। एसबीआई, यस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक पर भी 1000-1000 करोड़ रुपये की देनदारी बनती है।

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