अयोध्या विवाद: 31 जुलाई तक जारी रहेगी मध्यस्थता

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 18-07-2019 / 12:18 PM
  • Update Date: 18-07-2019 / 12:18 PM

नई दिल्ली। अयोध्या विवाद को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला आ चुका है। अयोध्या में राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद में मध्यस्थता की प्रगति पर सुनवाई करते हुए कमेटी को 31 जुलाई तक का समय दिया है। सुनवाई के दौरान मध्यस्थता समिति के अध्यक्ष जस्टिस कलीफुल्ला ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट सबमिट की। इसपर सीजेआई ने कहा कि हम अब 2 अगस्त को सुनवाई की तारीख तय करते हैं। हम मध्यस्थता समिति से अनुरोध करते हैं कि वह 31 जुलाई तक कार्यवाही के परिणाम की सूचना दे।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 11 जुलाई को इस मुद्दे पर रिपोर्ट मांगी थी और कहा था कि अगर अदालत मध्यस्थता कार्यवाही पूरी करने का फैसला करती है तो 25 जुलाई से रोजाना आधार पर सुनवाई शुरू हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि, 31 जुलाई तक मध्यस्थ्ता जारी रहेगी और 2 अगस्त से रोजाना सुनवाई खुली कोर्ट में होगी.

बता दें, कुछ दिन पहले राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले के एक पक्षकार गोपाल सिंह विशारद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अपनी याचिका में गोपाल सिंह ने कहा था कि मध्यस्थता कमेटी के नाम पर विवाद सुलझने के आसार बेहद कम हैं, क्योंकि इसमें तो सिर्फ समय बर्बाद हो रहा है, इसलिए कोर्ट मध्यस्थता कमेटी खत्म कर स्वयं सुनवाई करके मामले का निस्तारण करें।

गोपाल सिंह के वकील पीएस नरसिम्हा ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की पीठ के सामने कहा था कि यह विवाद पिछले 69 सालों से अटका पड़ा है और मामले को हल करने के लिए शुरू की गई मध्यस्थता का रुख सकारात्मक नजर नहीं आ रहा है। 11 संयुक्त सत्र आयोजित किए जा चुके हैं, लेकिन ऐसा लगता है कि कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। यह विवाद मध्यस्थता के जरिए सुलझाना मुश्किल है।

गोपाल सिंह विशारद की इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्थता कमेटी से रिपोर्ट तलब की। इस प्रगति रिपोर्ट को आज सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ देखेगी। बेंच अगर मीडिएशन प्रॉसेस से संतुष्ट नहीं हुई तो 25 जुलाई से रोजाना सुनवाई का ऐलान कर सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच जजों की संविधान पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस कलीफुल्ला की अध्यक्षता में मध्यस्थता कमेटी बनाकर इस मसले को बातचीत के जरिए आपसी सहमति से ही सुलझाने की पहल की थी। पहले शुरुआत में कमेटी को दो महीने यानी 8 हफ्ते दिए गए, फिर ये अवधि अगले 13 हफ्तों यानी 15 अगस्त तक के लिए बढ़ा दी गई।

हिंदू संगठन मध्यस्थता की प्रक्रिया समाप्त करने की मांग कर रहे हैं
पीठ ने मूल वादियों में शामिल गोपाल सिंह विशारद के एक कानूनी उत्तराधिकारी द्वारा दाखिल आवेदन पर सुनवाई करते हुए आदेश जारी किया। आवेदन में विवाद पर न्यायिक फैसले की और मध्यस्थता प्रक्रिया समाप्त करने की मांग की गई थी। आरोप लगाया गया था कि इस मामले में ज्यादा कुछ नहीं हो रहा। पीठ ने कहा था कि अदालत मध्यस्थता समिति द्वारा दाखिल रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद 18 जुलाई को उचित आदेश जारी करेगी। समिति में आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीराम पांचू भी शामिल हैं।

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