‘धूम सीरीज में कोई न कोई एंटी-इस्टैब्लिशमेंट चीज अंतर्निहित है’

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 20-12-2020 / 7:33 PM
  • Update Date: 20-12-2020 / 7:33 PM

धूम 3 की सातवीं सालगिरह पर डायरेक्टर विक्टर आचार्य बता रहे हैं कि इंडियन सिनेमा की सबसे बड़ी फ्रेंचाइजी के बारे में लोग सबसे ज्यादा क्या पसंद करते हैं

धूम और धूम 2 के लेखक तथा धूम 3 के निर्देशक विजय कृष्ण (विक्टर) आचार्य ने दिल की धड़कन बढ़ा देने वाली इन एंटी-हीरो इंटरटेनर फिल्मों के दम पर भारत को उसकी सबसे बड़ी फ्रेंजाइजी दी है। इस सीरीज की सभी फिल्में स्क्रीन पर वाकई विजुअल स्पेक्टेकल साबित हुईं। बॉक्स ऑफिस पर तमाम रिकॉर्ड तोड़ने वाली धूम 3 की सातवीं सालगिरह पर विक्टर यह डिकोड करने की कोशिश कर रहे हैं कि लोग इस फ्रेंचाइजी को इतना ज्यादा क्यों पसंद करते हैं।

वह कहते हैं, “एक दर्शक के नाते तथा एक बड़े होते बच्चे के तौर पर मुझे चोरी-डकैती वाली फिल्म बहुत भाती थी। मुझे लगता है कि चोरी-डकैती वाली हर फिल्म में कोई न कोई एंटी-इस्टैब्लिशमेंट चीज अंतर्निहित होती है, और धूम सीरीज भी इसी चीज के हक में खड़ी होती है। अगर आप किसी भी ऐसी फिल्म पर नजर डालें, जिसके किरदार नैतिक तौर पर ग्रे शेड रखते हों, तो वे किसी न किसी रूप में समाज के खिलाफ बगावत करते दिखेंगे, या कि जैसा धूम 3 में था, बदला लेते दिखाई देंगे।“

विक्टर धूम सीरीज को लेकर अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि के बारे में बात करते हैं। उनका कहना है, “एक लेखक के तौर पर अपने तईं मेरा मानना है कि जब आप ऐसी फिल्में लिखने बैठते हैं, जिनमें आपको ऑडियंस की तरफ से एक खास किस्म की भागीदारी या प्रशंसा चाहिए होती है, तो आपकी सबसे बड़ी जीत यह हकीकत होती है कि फिल्म को पसंद किया गया और इसकी एक पॉपुलर अपील रही। मेरा एकदम दृढ़ विश्वास है कि लेखक की भूमिका या उसका काम पॉपुलर अपील की तलाश करना नहीं होता, हमारी भूमिका उस काम को करने की कोशिश में निहित होती है, जिसे हम करना चाहते हैं या करना पसंद करते हैं। साथ ही साथ ऑडियंस की मौजूदा किस्म को समझते हुए दिमाग में एक तरह का कोई अंत रचना पड़ता है, लेकिन यह हर किस्म की ऑडियंस को खुश नहीं कर सकता।“

वह आगे बताते हैं, “मेरे कहने का आशय यह है कि एक लेखक के तौर पर आपको यह हरगिज नहीं करना चाहिए, क्योंकि आपको दर्शकों के पीछे भागना नहीं है, और कम से कम मेरे लिए…मैंने जो कुछ भी लिखा है, मेरा मानना है कि वह चाहे हिट हुआ हो या पिट गया हो, मजेदार सफर रहा है। वजह यही है कि आपको कुछ नया या अलग लिखने की कोशिश करनी होगी। और इसी तरीके से धूम सामने आई। ईमानदारी की बात तो यह है कि धूम के प्रथम भाग से पहले उस तरह के ड्रामे के बिना कोई फिल्म बनाना ही नहीं चाहता था, जो हिंदी फिल्मों में होता था। यहां तक कि धूम 2 में भी सारे ए-लिस्ट वाले स्टार एक एक्शन फिल्म कर रहे थे। लेकिन उसमें हर किसी के लिए पर्याप्त काम और स्कोप था तथा यह एक इंटरटेनर फिल्म थी। यह एक सच्ची इंटरटेनर फिल्म थी।“

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