एयरटेल ने दूरसंचार विभाग को 10,000 करोड़ के बकाए का किया भुगतान

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 17-02-2020 / 7:37 PM
  • Update Date: 17-02-2020 / 7:37 PM

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की फटकार और सरकार की सख्ती के बाद टेलिकॉम कंपनी भारती एयरटेल ने पिछले दिनों किए गए अपने वादे के अनुसार 10,000 करोड़ रुपये के एजीआर बकाए का भुगतान दूरसंचार विभाग को कर दिया है और अब कंपनी पर 25,000 करोड़ रुपये का बकाया रह गया है।

कोर्ट के आदेश के मुताबिक, एयरटेल को एजीआर के मद में 35,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना है और पिछले दिनों उसने कहा था कि वह 20 फरवरी तक 10,000 करोड़ रुपये का भुगतान कर देगी।

वहीं, भारी-भरकम कर्ज तथा लगातार हो रहे घाटे से घोर वित्तीय संकट में फंसी टेलिकॉम कंपनी वोडाफोन-आइडिया एजीआर सरकार को वैधानिक बकाया चुकाने के लिए तैयार है, लेकिन उसका कहना है कि वह अपना कारोबार तभी जारी रख सकती है, जब सुप्रीम कोर्ट दूरसंचार विभाग को 53,000 करोड़ रुपये का बकाया चुकाने के लिए दी गई समय-सीमा में उदारता बरतने पर विचार करेगा।

वोडाफोन-आइडिया पर 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है और सुप्रीम कोर्ट के एजीआर पर फैसले का सबसे ज्यादा असर उसी पर पड़ा है। कंपनी ने कहा, ‘वह इस बात का आकलन कर रही है कि वह सरकार को कितने पैसे दे सकती है।’ दूरसंचार विभाग को वह एजीआर बकाये का भुगतान कर पाएगी या नहीं, इस आशंका के बीच कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘कंपनी ने इस तरह से आकलन की गई राशि का अगले कुछ दिनों में भुगतान का प्रस्ताव दिया है।’ हालांकि, उसने यह बात भी स्पष्ट किया है कि भुगतान की समय-सीमा के संदर्भ में उसे राहत की जरूरत है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल 24 अक्टूबर को दिए गए अपने आदेश में तीन महीने (23 जनवरी तक) के भीतर कंपनियों को बकाया चुकता करने को कहा था। इसके बाद कंपनियों ने कोर्ट से बकाया चुकाने की समय-सीमा फिर से विचार करने की मांग को लेकर एक याचिका दायर की थी, लेकिन उसे शुक्रवार को खारिज कर दिया गया। वोडाफोन आइडिया और इसके प्रमोटर्स ब्रिटेन के वोडाफोन ग्रुप तथा भारत के आदित्य बिड़ला ग्रुप पहले ही कह चुके हैं कि अगर सरकार तथा सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कंपनी को राहत नहीं मिली तो कंपनी बंद हो जाएगी।

एक तरफ टेलिकॉम कंपनियां जहां एजीआर बकाये का भुगतान करने को लेकर रकम का बंदोबस्त करने के तरीके तलाश रही है, वहीं सुप्रीम कोर्ट का आदेश सार्वजनिक क्षेत्र के कई उपक्रमों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ है। इन गैर टेलिकॉम कंपनियों-गेल, ऑइल इंडिया, पावरग्रिड तथा दिल्ली मेट्रो को भी एजीआर की रकम का भुगतान करने के लिए कहा गया है।

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