दालभात केंद्रों में चावल के बाद अब केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को मिलने वाले मिट्टी तेल के कोटे में की कटौती… 38 फीसदी की कटौती… कोटा बढ़ाने सीएम भूपेश ने लिखा था पीएम को पत्र…

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 26-06-2019 / 10:02 PM
  • Update Date: 26-06-2019 / 10:02 PM

रायपुर। छात्रावासों और दाल भात सेंटर के लिए अनाज बंद करने के बाद केंद्र सरकार ने राज्य को मिलने वाले मिट्टी तेल के कोटे में कटौती कर दी है। गरीबों के घर चूल्हा जलाने वाले मिट्टी के तेल में 38 फीसदी की कटौती की गई है। पहली तिमाही में 28 हजार 764 किलोलीटर आबंटन किया गया था। जबकि दूसरी तिमाही के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने 17 हजार 880 किलोलीटर आबंटन तय किया है।

यह हाल तब है जब मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बीते मार्च में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर मिट्टी तेल का कोटा बढ़ाए जाने की मांग की थी। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत बांटे जाने वाले मिट्टी तेल का कोटा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 26 मार्च 2019 को प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी थी। उन्होंने चिट्ठी में कहा था कि उज्जवला योजना के तहत वितरित कनेक्शनों की संख्या में बढ़ोतरी के आधार पर साल 2018-19 के लिए मिट्टी तेल का आबंटन 1.15 लाख किलोलीटर कर दिया गया है, जबकि साल 2015-16 में यह 1.72 लाख किलोलीटर था।

भूपेश बघेल ने अपनी चिट्ठी में यह भी कहा था कि राज्य को आबंटित होने वाले मिट्टी तेल के अपर्याप्त कोटे की वजह से राज्य सरकार 12.90 लाख राशनकार्डधारियों को केरोसिन का वितरण नहीं कर पा रहा है। एलपीजी सिलेंडरों के रिफिल कीमत के युक्तियुक्तकरण होते तक तथा एलपीजी वितरकों की संख्या में पर्याप्त प्रसार होने तक ईंधन के रूप में मिट्टी तेल की जरूरत बनी रहेगी। इसकी कटौती से गरीब परिवारों को अत्यधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री को लिखी गई अपनी चिट्ठी में लिखा था कि हमारा राज्य 1.35 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है। वितरकों की संख्या कम है। ग्रामीण अंचलों में निवासरत नागरिक कई किलोमीटर की यात्रा करके रिफिल सिलंडर हासिल करे, यह बेहद जटिल है। घर पहुंच सेवा भी विश्वसनीय नहीं है। यही वजह है कि गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले परिवारों के लिए सिलेंडर की बजाए खाना पकाने के लिए ईंधन के रूप में मिट्टी तेल के उपयोग की जरूरत पड़ती है।

उन्होंने लिखा था कि स्पष्ट करते हैं कि प्रत्येक हितग्राही द्वारा प्रतिवर्ष औसतन एक ही सिलेंडर रिफिल कराया गया है। इसकी वजह है कि गरीबी रेखा से नीचे रहने वालों को सिलेंडर की पूरी कीमत जो राज्य में 773 रूपए है, उस पर खरीदना पड़ता है। जबकि सब्सिडी की राशि जो 270 रूपए है, वह बाद में हितग्राही के खाते में आती है। गरीब परिवार एकमुश्त यह राशि नहीं दे पाता। भूपेश बघेल की चिट्ठी के बाद भी केंद्र सरकार ने राज्य के हिस्से आने वाले मिट्टी तेल में भारी कटौती कर दी है। इस कटौती का असर राज्य की गरीब जनता पर प्रत्यक्ष तौर पर पड़ने वाला है।

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