शेर बांधने पर फंसे अफरीदी,जाना पड़ सकता है जेल

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 27-06-2018 / 1:08 PM
  • Update Date: 27-06-2018 / 1:08 PM

नई दिल्ली। पाकिस्तान के जाने-माने क्रिकेट खिलाड़ी शाहिद अफरीदी पर अपने घर में शेर रखने के मामले में फस सकते हैं। जानवरों के संरक्षण के लिए काम करने वाले कुछ संगठनों का कहना है कि इसकी जांच होनी चाहीए कि अफरीदी ने घर में कैसे शेर को रख लिया। उन्हे भारी जुर्माना या जेल की सजा दी जानी चाहीए।  अगर उन्होने जरूरी औपचारिकता पूरी नही की है तो उन्हे सजा मिलनी चाहीए। दूसरी तरफ अफरीदी के दीवानों का कहना है शाहिद ने हिफाजत के साथ शेर को रख रखा है दूसरे लागों को भी उनसे सीखना चाहीए।  इस घटना के बाद पंजाब के सिंध प्रांत के जंगली जीव संरक्षक ताज मुहम्मद शेख ने अफरीदी के खिलाफ जांच शुरू कर दी है। शेख ने मीडिया से बातचीत में कहा कि,  इस शेर का मालिक हसन हुसैन है। उसके पास शेर रखने का लाइसेंस है। लेकिन, ये अफरीदी के घर में क्या कर रहा था, हम इसकी तहकीकात करेंगे।

शेर का मालिक है हसन,परमिट भी है उसके पास

शेर के मालिक हसन हुसैन का कहना है कि, उन्होंने शेर को अफरीदी के घर में ले जाने से पहले सिंध वन विभाग से अनुमति ले ली थी। अफरीदी के कुछ दुश्मन हैं जो उन्हें बदनाम करना चाहते हैं।  हसन के मुताबिक उन्हें शेर रखने के साथ साथ उसे लेकर घुमने का भी परमिट है। हुसैन ने बताया कि उसने लाहौर से एक शेर और एक शेरनी को 15 लाख रुपये में खरीदा था। शेर और शेरनी के इस जोड़े ने दो नर बच्चे को जन्म दिया। उन्हीं में से एक सिंबा को लेकर वो अफरीदी के घर गए थे। सिंबा उनके परिवार के सदस्य की तरह रहता है। लाइसेंस देने वाली संस्था के मुताबिक शेर को सिर्फ लाहौर की सीमा में रखा जा सकता है। ऐसे में ये देखना होगा कि कहीं इस नियम का उल्लंघन तो नहीं हुआ। ऐसा हुआ तो अफरीदी को आरोपी बनाया जा सकता है।

पाकिस्तान में स्पष्ट नहीं है कानून

इस मामले में पाकिस्तान में कानून स्पष्ट नही है। प्रस्ताव कई दिनों से अटका हुआ है। लाईसेंस इंचार्र्ज रशीद आगा कहना है कि जानवर सिर्फ चिड़ियाघर में ही रखे जाने चाहीए। अभी सिर्फ परमिट जारी किया जाता है वो भी पूरी जांच परख के बाद। सिंध वाईल्ड लाईफ संरक्षण आॅर्डिनेंस के मुताबिक ये रखरखाव की शर्ते पूरी होने के बाद ही जंगली जानवरों को घर या एसी किसी जगह पर रखा जा सकता है जंहा इंसान रहते हों। औपचारिकता पूरी नही करने पर अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किए जाने का प्रावधान है।

भारत में है सात साल की जेल

भारत में किसी भी जंगली जानवर को पकड़ना, फंसाना, जहर देना या लालच देना दंडनीय अपराध है. इसके दोषी को सात साल की सजा या 25 हजार रुपये का जुमार्ना या दोनों हो सकते हैं।

जानवरों को लेकर भारत में कानून

  1. कोई भी पशु (मुर्गी समेत) सिर्फ बूचड़खाने में ही काटा जाएगा. बीमार और गर्भ धारण कर चुके पशु को मारा नही जाएगा.प्रिवेंशन आॅफ क्रुएलिटी आॅन एनिमल्स एक्ट और फूड सेफ्टी रेगुलेशन में इस बात पर स्पष्ट नियम हैं.
  2. भारतीय दंड संहिता की धारा 428 और 429 के मुताबिक किसी पशु को मारना या अपंग करना, भले ही वह आवारा क्यों न हो, दंडनीय अपराध है.
  3. वाइल्डलाइफ एक्ट के तहत बंदरों को कानूनी सुरक्षा दी गई है. कानून कहता है कि बंदरों से नुमाइश करवाना या उन्हें कैद में रखना गैरकानूनी है.
  4. पशुओं को लड़ने के लिए भड़काना, ऐसी लड़ाई का आयोजन करना या उसमें हिस्सा लेना संज्ञेय अपराध है.
  5. ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक रूल्स 1945 के मुताबिक जानवरों पर कॉस्मेटिक्स का परीक्षण करना और जानवरों पर टेस्ट किये जा चुके कॉस्मेटिक्स का आयात करना प्रतिबंधित है
  6. चिड़ियाघर और उसके परिसर में जानवरों को चिढ़ाना, खाना देना या तंग करना दंडनीय अपराध है. पीसीए के तहत ऐसा करने वाले को तीन साल की सजा, 25 हजार रुपये का जुमार्ना या दोनों हो सकते हैं
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