वास्तु के अनुसार ऐसा होना चाहिए आपके बच्चों का कमरा

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 07-11-2017 / 9:08 PM
  • Update Date: 07-11-2017 / 9:08 PM

भारत की प्राचीन वास्तुशिल्प विधि वास्तु शास्त्र किचन, गेराज और बच्चो के कमरे जैसे घर के प्रत्येक क्षेत्र में लागू होता है। ऐसा माना जाता है कि यदि एक घर का निर्माण वास्तु सिद्धांतों के अनुसार किया जाता है, तो यह उस घर में रहने वाले लोगो के लिए स्वास्थ्य और धन दोनों के अनुकूल रहता है। घर में बच्चो के कमरे का निर्माण वास्तु के अनुसार करना उसके मानसिक और शारीरिक दोनों तरह के विकास में सहायता करता है। इसलिए चाहे यह बच्चो के कमरे का स्थान हो या फिर उनके कमरे में रखा गया फर्नीचर, सभी के लिए वास्तु के नियमो का पालन जरूर करना चाहिए। इस से सम्बंधित कुछ उपाय नीचे दिए गए है –

कमरे के निर्माण के लिए सबसे अच्छी दिशा
घर में बच्चों के कमरे के निर्माण के लिए पश्चिम सबसे उपयुक्त दिशा है। इसके अलावा बच्चों के कमरे के निर्माण पश्चिम, उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्वी दिशाओं में भी किया जा सकता है। बच्चो के कमरे का निर्माण दक्षिण-पश्चिम दिशा में नहीं करना चाहिए।

बेड की स्थिति
बच्चों के कमरे में, बेड दक्षिण-पश्चिम कोने में रखा जाना चाहिए। बेड को इस तरह रखें कि सोते समय बच्चे का चेहरा पूर्व या दक्षिण दिशा में हो।

दर्पण की स्थिति
बच्चो के कमरे के लिए वास्तु नियमो के अनुसार, दर्पण को बेड की विपरीत दिशा में नहीं रखना चाहिए।

सकारात्मक ऊर्जा
बच्चों के कमरे में फर्नीचर दीवार से कुछ इंच की दूरी पर रखें। फर्नीचर को दीवार के साथ रखना सकारात्मक ऊर्जा के प्रवाह को रोकता है।

उत्तरपूर्वी कोना
कमरे में स्टडी डेस्क को इस तरह से रखा जाना चाहिए, जिससे पढ़ाई करते समय बच्चा पूर्व, उत्तर या पूर्वोत्तर कोने का सामना करता है। इसके लिए पूर्व सबसे उपयुक्त दिशा है क्योंकि यह पढ़ने के लिए आवश्यक एकाग्रता को बढाती है।

टेलीविज़न और कंप्यूटर
बच्चो के कमरे में टेलीविज़न या कंप्यूटर बेड की विपरीत दिशा में न रखें। बंद होने पर टेलीविज़न सेट या कंप्यूटर मॉनिटर, दर्पण की तरह बिस्तर को प्रतिबिंबित करता है जो कि अशुभ माना जाता है।

टेलीविज़न और कंप्यूटर के लिए सही दिशा
बच्चो के कमरे में दर्पण और टेलीविज़न बिस्तर की दांयी या बांयी तरफ रखें।

दरवाजे और खिड़कियां
बच्चों के कमरे में दरवाजा बिस्तर के ठीक विपरीत दिशा में नहीं होना चाहिए। बच्चों के कमरे के दरवाजे और खिड़कियां पूर्व या उत्तर दिशा में बनाना सबसे सही रहता है। इसके अलावा खिड़कियां दरवाजे के सामने होनी चाहिए।

पॉइंटिंग नुक्स
नुकीली और धार वाली वस्तुओ में नकारात्मक ऊर्जा होती है इसलिए इन्हे बच्चों के कमरे में नहीं रखना चाहिए।

अलमारीयां
बच्चों के कमरे का बीच का क्षेत्र हमेशा खाली होना चाहिए। अलमारियाँ हमेशा कमरे की दक्षिण या पश्चिम दिशा में बनवाएं।

ऊर्जा
प्रकाश उत्पन्न करने वाली वस्तुएं कमरे के दक्षिण-पूर्व कोने में रखे जाने पर ये स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करने में सहायता करते है।

तीव्र रोशनी
बच्चों के कमरे में तीव्र रोशनी और स्पॉट लाइट का इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये मानसिक तनाव पैदा करते है।

दीवार के रंग
बच्चों के कमरे के लिए हरा सबसे अच्छा रंग रहता है, क्योंकि यह ताजगी और शांति से बढ़ाता है और इससे मानसिक शक्ति भी बढ़ती है।

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