312 अफसरों को काम न कर पाने का मिला ‘ईनाम’

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 11-07-2019 / 7:46 PM
  • Update Date: 11-07-2019 / 8:57 PM

नई दिल्ली। दूसरी बार बहुमत हासिल कर सत्ता में आई मोदी सरकार सख्त फैसले ले रही है। इस बार सरकार ने कुछ ऐसे बड़े फैसले लिए हैं जो देश के हित में दिखाई दे रहे हैं। अपने एक फैसले के तहत केन्द्र सरकार ने काम नहीं करने वाले अफसरों पर कार्रवाई कार्रवाई करते हुए ग्रुप A और ग्रुप B के कुल 312 अफसरों को जब‍रन रिटायर कर दिया है। सरकार ने ग्रुप ए के 36000 कर्मचारियों और ग्रुप बी के 82000 कर्मचारियों के काम का आंकलन किया है। इनमें से 312 अफसर नकारा मिले।

इन नाकारा अफसरों में ग्रुप A के 125 अफसर और ग्रुप B के 187 अफसर हैं। ये बात उस वक्त सामने आई जब लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक सवाल का जवाब दे रहे थे। अपने जवाब में पीएम ने बताया कि सरकार ने मौजूदा सबूतों के आधार पर भ्रष्‍ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की और उन्‍हें रिटायर कर दिया है।

यह कार्रवाई फंडामेंटल रूल्‍स , सेंट्रल सिविल सर्विसेज पेंशन रूल्‍स 1972 और ऑल इंडिया सर्विसेज के संशोधित रूल 16(3) के तहत की गई है। इसके तहत सरकार को अधिकार है कि वह किसी भी अफसर के काम का कुछ अंतराल पर आंकलन कर सकती है और उन्‍हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे सकती है।


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केन्द्र सरकार के इस कदम के बाद कई राज्यों की सरकारें भी सक्रिय भूमिका में आ गई हैं। उत्तर प्रदेश सरकार भी भ्रष्ट अफसर के खिलाफ कड़े कदम उठाते हुए 600 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें 200 अधिकारी ऐसे हैं, जिन्हें पिछले 2 साल में सेवानिवृत्त कर दिया गया है। पिछले 2 साल में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्हें समय पूर्व अनिवार्य रिटायरमेंट दिया गया है और कई अधिकारियों को चेतावनी दी गई है और उनके प्रमोशन रोक दिए गए हैं।


उत्तराखंड सरकार भी भ्रष्ट और नाकारा अफसरों को समय पूर्व अनिवार्य सेवानिवृत्ति प्रदान करने जैसा सख्त कदम उठाने की रणनीति तैयार कर रही है। इसके लिए विभागों से सूची बनाने को कहा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले चरण में इस सूची में 50 वर्ष की आयु पार कर चुके अधिकारियों को शामिल करने को कहा गया है। अगले चरण में विभिन्न विभागों के भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, मध्य प्रदेश सरकार भी नकारा कर्मचारियों को नौकरी से बाहर करने जा रही है। इसके लिए विभागीय स्तर पर समीक्षा के बाद अक्षम कर्मचारियों को आवश्यक सेवानिवृत्ति  दे दी जाएगी। क्या कहते हैं नियम-रूल 56 का इस्तेमाल ऐसे अधिकारियों पर किया जा सकता है जो 50 से 55 साल की उम्र के हों और 30 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं। सरकार के जरिए ऐसे अधिकारियों को अनिर्वाय रिटायरमेंट दिया जा सकता है।

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