नरेंद्र मोदी के बाद संघ की पसंद है योगी आदित्य नाथ

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 15-10-2017 / 12:18 AM
  • Update Date: 15-10-2017 / 11:27 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बाद अब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को सबसे अधिक पसंद कर रहा है। वैसे योगी संघ को पहले से ही पसंद थे। बताते हैं कि उन्हें मुख्यमंत्री का ताज संघ के आदेश के बाद ही मिला था वरना तो उन्हें सांसद के रूप में ही रहते हुए अपना जीवन निर्वाह करना पड़ता। छह महीने पहले तक देश में केवल दो ही नाम चर्चा में रहते थे वे होते थे मोदी – शाह। पार्टी की रैलियां हो या चुनावी सभाएं केवल इन्ही नामों पर भीड़ जुटती थी या जुटाई जाती थी लेकिन अब पैटर्न बदलता दिख रहा है।

संघ ने इस सूची में तीसरा नाम भी जोड़ दिया है। वह तीसरा नाम है योगी आादित्य नाथ का। योगी का राजनीतिक सफर भगवाधारी नेता के रूप में शुरु हुआ था सो बरकरार है। उसमें किसी भी तरह की कोई तब्दीली नहीं आई है। संवैधानिक कुर्सी पर बैठने के बाद भी योगी ने चोला नहीं बदला, भगवाधारी मुख्यमंत्री बनकर एक नया संदेश देने की कोशिश की। उनका उद्देय और संदेश साफ था कि वह अपनी कट्टरता नहीं छोड़ंगे चाहे उन्हें जिस भी पद पर बैठा दिया जाए लेकिन वह रहेंगे वही आदित्यनाथ जो पहले थे। यही कट्टरता आज संघ को बहुत पसंद आ रही है। संघ को उनमें भाजपा का भविष्य भी दिखने लगा है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को राज्य के बाहर, सभाएं करने के लिए , भेजने का फैसला अचानक नहीं हुआ है यह सब संघ की सोची समझी रणनीति के तहत हुआ है संघ की नीतियों मुताबिक देश पहले होता है व्यक्ति नहीं। वह राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानता है। इसी के तहत कोई भी काम करता है। संघ के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक भगवान न करें लेकिन यदि मोदी और शाह के नामों के आगे कल को कोई बड़े प्रश्नचिन्ह लग गए तो उस स्थिति से निपटने के लिए उसने अभी से ही तैयारी शुरु कर दी है। उसी के तहत योगी का नाम आगे किया जा रहा है। योगी को मुख्यमंत्री बने ठीक से छह महीने भी नहीं हुए थे कि उन्हें राज्य के बाहर भेजा जाना शुरु कर दिया गया।

चूंकि गोरक्षपीठ के महंत के रूप में उनकी छवि बहुत ही उज्जवल रही है। इससे हर हिंदू उन्हें देखना व सुनना चाहता है। उन्हें दिल से पसंद करता हो या न करता हो, पार्टी की विचार धारा से उसके विचार मेल खाते हों या न खाते हों लेकिन कमोबेश हर हिन्दू गोरक्ष पीठाधीश्वर से तो मिलना , सुनना व देखना तो चाहता ही है। लोगों की इसी ललक को ध्यान में रखते हुए संघ ने योगी को खुले मैदान में उतारने का फैसला किया है। जिसके तहत धीरे धीरे उन्हें उत्तर से सुदूर दक्षिण तक भेजने की रणनीति बनाई गई है। हाल के दिनों में उनकी दिल्ली , मध्य प्रदेश, हरियाणा, केरल व गुजरात की यात्राएं सभाएं इसी रणनीति का हिस्सा रही हैं।

वैसे सरकारें चाहे जिनकी हों, देश के सभी नागरिकों को , सभी वर्ग के लोगों को, एक साथ खुश नहंीं रख सकतीं। देशहित में , जनहित में उन्हें कई बार कठोर फैसले लेने पड़ते हैं जिससे नाराजगियां बढती हैं. मौजूदा नरेंद्र मोदी सरकार भी नोटबंदी और जीएसटी जैसे दो कठोर फैसलों से उलझ गई है।बडा़ व महत्वपूर्ण काम करने के बावजूद भी उसे आम जनता की नाराजगियां ही झेलनी पड़ रही हैं।वैसे अपेक्षा के मुताबिक अब इन फैसलों के लाभदायी परिणाम आने शुरु भी हो चुके हैं। लेकिन विपक्ष सरकार को बदनाम करो मिशन पर जुटा हुआ है। वह इनकी विफलताओं को इस कदर प्रचारित कर रहा है कि जैसे मानों देश में कुछ भी कल्याणकारी काम नहीं हो।

विपक्षी कुप्रचार के चलते जनता के मन में संभ्रम निर्माण होता दिखने लगा है। संघ ने इसे भांप लिया है। लिहाजा योगी को यूपी से बाहर भेजने की जरूरत ही क्यों पड़ती। सूत्रों के मुताबिक संघ की अगली रणनीति योगी को भाजपा के सबसे बड़े प्रचारक के रूप में तैयार करना है। मोदी- शाह के बाद सबसे तगड़े प्रचारक के रूप में उन्हें तैयार करने का काम शुरु भी हो गया है। उनकी सभाओं को सफल करने के लिए संघ अपनी पूरी ताकत लगा रहा है। केरल और गुजरात में इकट्ठा हो रही भीड़ उसी का परिणाम है। वैसे अमित शाह के बेटे के विवाद ने उन्हें आंशिक रूप से कमजोर कर दिया है। ऐसी स्थिति में योगी को पूरी ताकत के साथ देश भर में घुमाने की योजना तैयार की गई है।

साभार : श्री नारायण तिवारी, 98672-21155,
(लेखक : एब्सल्यूट इंडिया के संपादक हैं।

 

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