क्यों मनाया जाता है नवरात्रि का त्यौहार…

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 20-09-2017 / 2:55 AM
  • Update Date: 20-09-2017 / 2:58 AM

बरसों से हम नवरात्रि का त्यौहार मनाते आ रहे हैं। हमारे देश में अलग-अलग तरीके अलग-अलग हिस्सों में इस त्यौहार को मनाया जाता है। कहीं पूरी रात गरबा और आरती कर नवरात्रि के वत्र को रखते हैं तो कहीं कुछ लोग नौ दिन का उपवास रखते हैं। और मां जगदंबा के नौ रूपों की पूजा उपासना करते हैं। लेकिन इस नवरात्र के पीछे ऐसा कौनसी कहानी है जिसके कारण यह मान्यता हुई की नवरात्र पर्व मनाया जाए… आइए जानते हैं… जुड़ी एक पौराणिक कथा है। महिषासुर नाम का एक बड़ा ही राक्षस था। राक्षस अमर होना चाहता था और उसी इच्छा के चलते उसने भगवान ब्रह्मा की उसने कठोर तपस्या की। ब्रह्माजी उसकी तपस्या से प्रसन्न हुए और उसे दर्शन देकर कहा कि उसे जो भी वर चाहिए वो मांग सकता है। महिषासुर ने अपने लिए अमर होने का वरदान मांगा। महिषासुर की ऐसी बात सुनकर ब्रह्मा जी बोले, जो इस संसार में पैदा हुआ है उसकी मौत निश्चित है। इसलिए जीवन और मृत्यु को छोड़कर जो चाहो मांग लोग। ऐसा सुनकर महिषासुर ने कहा, ठीक है प्रभु, फिर मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि मेरी मृत्यु ना तो किसी देवता या असुर के हाथों हो और ना ही किसी मानव के हाथों। अगर हो तो किसी स्त्री के हाथों हो। महिषासुर की ऐसी बात सुनकर ब्रह्माजी ने तथास्तु कहा और चले गए। इसके बाद तो महिषासुर राक्षसों का राजा बन गया उसने देवताओं पर आक्रमण कर दिया। देवता बहुत घबरा गए। हालांकि उन्होंने एकजुट होकर महिषासुर का सामना किया जिसमें भगवान शिव और विष्णु ने भी उनका साथ दिया, लेकिन महिषासुर के हाथों सभी को पराजय का सामना करना पड़ा और देवलोक पर महिषासुर का राज हो गया। महिषासुर से रक्षा करने के लिए सभी देवताओं ने भगवान विष्णु के साथ आदि शक्ति की आराधना की। उन सभी के शरीर से एक दिव्य रोशनी निकली जिसने एक बेहद खूबसूरत अप्सरा के रूप में देवी दुर्गा का रूप धारण कर लिया। देवी दुर्गा को देख महिषासुर उन पर मोहित हो गया और उनसे शादी करने का प्रस्ताव सामने रखा। बार बार वो यही कोशिश करता।
देवी दुर्गा मान गईं लेकिन एक शर्त पर..उन्होंने कहा कि महिषासुर को उनसे लड़ाई में जीतना होगा। महिषासुर मान गया और फिर लड़ाई शुरू हो गई जो 9 दिनों तक चली। दसवें दिन देवी दुर्गा ने महिषासुर का अंत कर दिया…और तभी से ये नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इन नौ दिनों जो भी साधक मां भगवती जगदंबा की आराधना करता है उसे मन चाहा वर प्राप्त होता है। उसके जीवन के सारे कष्ट खत्म होते हैं। उसकी विजय निश्चित हो जाती है। और जो नौ दिन पूजा-उपासना कर 9वें दिन छोटी-छोटी कन्याओं को प्रीतिकर भोज कराता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी होती है।

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