सरकार का मिट्टी की जाँच पर जोर

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 26-12-2015 / 5:08 PM
  • Update Date: 26-12-2015 / 5:08 PM

नई दिल्ली। भारत सरकार की ओर से इन दिनों मिट्टी की जाँच पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिला-स्तर पर स्थापित प्रयोगशालाओं में गाँवों की मिट्टी पहुँचाने के लिए किसान मित्रों का भी चयन किया गया है। ये किसान मित्र अपने-अपने गाँव के किसानों की मिट्टी को लेकर प्रयोगशाला तक पहुँचा रहे हैं और प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर किसानों को रासायनिक खाद एवं अन्य पोषक तत्वों का प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है।

जाँच के बाद उर्वरता मैप तैयार किया जाता है जिसमें उपलब्ध नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटेशियम का कितना प्रयोग किया जाना चाहिए, इसका विस्तृत ब्यौरा तैयार किया जाता है। इसका बड़ा फायदा यह होता है कि मिट्टी की ताकत घटने के बजाय बढ़ती जाती है। भारत में कर्नाटक, असम, केरल, तमिलनाडु, हरियाणा और उड़ीसा में केन्द्रीय प्रयोगशाला की स्थापना की गई है।

इसके अलावा विभिन्न राज्यों में अलग से प्रयोगशालाएँ चल रही हैं। मिट्टी उर्वरता में खनिजों जैसे नाइट्रोजन, पोटेशियम और फास्फोरस की उपस्थिति को विचार में लिया जाता है। यह सही उर्वरकों के प्रापण तथा बीज के उपयुक्त प्रकार को चुनने में सहायता देती है, ताकि अधिकतम सम्भव फसल प्राप्त की जा सके। पौधे के मूलभूत पोषण के लिए इसमें पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्रा होना अनिवार्य है।

इसमें नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटेशियम शामिल हैं। इसके अलावा खनिज तत्वों जैसे बोरॉन, क्लोरीन, कोबाल्ट, ताम्बा, लौह, मैग्नीज, मैग्नीशियम, मोल्बिडिनम, सल्फर और जस्ता का होना भी जरूरी है क्योंकि ये खनिज पौधों का पोषण बढ़ाते हैं। इसी तरह इसमें कार्बनिक पदार्थ होते हैं जो मिट्टी की संरचना में सुधार लाते हैं। इससे मिट्टी को और अधिक नमी धारण करने की क्षमता मिलती है। इसका पीएच 6.0 से 6.8 होना चाहिए।

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