शायरी

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 09-09-2017 / 11:42 PM
  • Update Date: 09-09-2017 / 11:42 PM

उनकी जिंदगी में मेरी कोई अहमियत न थीं।
किसी खुशी में कोई दावत न थीं।
मैंने दिल उनके कदमों रख दिया पर उन्हें जमीन पर देखने की आदत न थीं।

हम टुट तो चकना चुर हो गये।
तुम मिले सारे गम दुर हो गये एक तेरी दोस्ती की खातिर हम टुटे काँच से कोहिनूर हो गये।

हर दिल दिलदार नहीं होता।
हर रिश्ते में प्यार नहीं होता।
ये तो दिल मिलने की बात हैं वरना सात फेरों में भी प्यार नहीं होता।

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