शादी करना चाहते हैं आप के कई MLA, सदन में छलका कुंवारों का दर्द

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 05-07-2017 / 11:53 AM
  • Update Date: 05-07-2017 / 11:53 AM
नई दिल्‍ली। देश की राजधानी दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) के कई माननीय विधायक असल जिंदगी में भी परेशान हैं। तर्क है कि उन्हें इतनी पगार नहीं मिलती जिससे परिवार का खर्च चलाया जा सके। ‘आप’ की अविवाहित विधायक राखी बिड़लान ने विधानसभा के विशेष सत्र के अंतिम दिन सोमवार को जब अपना दर्द सदन को बताया तो माहौल विनोदपूर्ण हो गया। राखी ने की इस टिप्पणी के बाद सदन में बैठे अन्य विधायक अचानक ठहाके लगाने लगे।
घर बसाना चाहते हैं कई विधायक 
राखी ने सदन में कहा कि कई विधायकों की अभी शादी नहीं हुई है। ये विधायक अपना घर बसाना चाहते हैं और जीवनसाथी की तलाश भी कर रहे है। कुंवारों की शिकायत है कि उन्हें वेतन कम मिलता है, इसलिए कोई उनसे शादी करने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि पार्टी में कई अविवाहित विधायकों का घर पगार के कारण नहीं बस पा रहा है।
शादी की बधाई 
असल मे 28 जून को विधानसभा का विशेष सत्र शुरू हुआ था, उसी रात बुराड़ी से ‘आप’ विधायक संजीव झा की शादी हुई थी। इसके चलते वह सत्र में शिरकत नहीं कर सके। सोमवार को जब वह सदन में आए तो सबने शादी के लिए बधाई दी। उसके बाद विधानसभा में नालों की सफाई को लेकर याचिका समिति द्वारा पेश रिपोर्ट पर चर्चा शुरू हुई।
कुंवारे हैं कई विधायक 
इसी बीच ‘आप’ विधायक राखी ने विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल से विधायकों का वेतन बढ़ाने संबंधी मुद्दा उठाने की अनुमति मागी। अध्यक्ष ने उनकी मांग ठुकरा दी। बावजूद इसके राखी ने कहा कि विधायकों को भी शादी करके अपना घर बसाना है। उनका वेतन बढ़ना बहुत जरूरी है। इसकी मांग विधानसभा में कई बार हो चुकी है। एक बार तो प्रस्ताव पास कर उपराज्यपाल के पास भेजा गया था उन्होंने प्रस्ताव गृह मंत्रालय भेज दिया। वहां से प्रस्ताव लौटा दिया गया। ‘आप’ विधायकों में राखी के अलावा जगपुरा से विधायक प्रवीण कुमार, अंबेडकरनगर के विधायक प्रकाश जारवाल इस समय कुंवारे हैं।
अभी मिलता है 12 हजार रूपए वेतन 
राखी ने बताया कि दिल्ली में विधायकों की सैलरी अन्य राज्यों की तुलना में कम है। विधायकों को 12 हजार रुपए ही बतौर बेसिक मिलते हैं। दिल्ली सरकार ने न्यूनतम मजदूरी भी बढ़ाकर 14,000 रुपए कर दी है। सभी भत्तों को मिलाकर कुल 52.53 हजार रुपए विधायकों के खाते में आते हैं। विधानसभा क्षेत्र में कई जगहों पर किराए के ऑफिस हैं। जनता के संग को-आर्डीनेट करने के लिए स्टाफ  भी रखा हुआ है।
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