रोटावेटर से उखड़वाना पड़ी सोयाबीन फसल

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 26-12-2015 / 5:23 PM
  • Update Date: 26-12-2015 / 5:31 PM

मूंदी सहित पुनासा तहसील के किसान सोयाबीन फसल बिगड़ने से मुश्किल में फंस गए हैं। कई किसानों को लागत निकालना मुश्किल हो गया। कुछ ऐसे अभागे किसान भी मिले जिनके खेत में सोयाबीन का पौधा तो पनपा लेकिन प्राकृतिक आपदा के कारण गिनी चुनी फल्लियां लगी। परिणाम यह रहा कि मुफ्त में फसल निकालकर ले जाने का आफर भी काम नहीं आया।

विवशता रही कि रोटावेटर से ही फसल को उखड़वाना पड़ा। अधिकांश किसान बैंक व सहकारी संस्थाओं में कर्जदार हो गए  हैं। कर्ज की अदायगी कैसे होगी? यह सवाल किसानों के लिये परेशानी का कारण बना हुआ है। सोयाबीन के अलावा बहुतायत से किसानों की पसंद बनी मिर्च फसल भी इसी बुरे  दौर से गुजरी। मिर्च फसल पर वायरस के अटैक ने उसे उखाड़ने पर मजबूर कर दिया है।

क्षेत्र का अन्नदाता अब सरकार के भरोसे है, अब सिर्फ चिन्ता इस बात को लेकर है कि सरकार कब तक राहत की घोषणा करती है।
सब कुछ चौपट, कर्ज कैसे देंगे
ग्राम जामन्या के आदिवासी हगरिया वल्द हरल्या ने बताया कि आठ एकड़ जमीन है, तीन एकड़ में 90 किलो सोयाबीन बोई थी बाकी  की पांच एकड़ में मिर्च व कपास की फसल बोई थी। सोयाबीन मात्र साढ़े तीन बोरा उत्पादन हुआ। वहीं मिर्च फसल वायरस की चपेट में आ गई। इस आदिवासी ने बताया कि प्राकृतिक मार नहीं होती तो उसको 25 बोरी सोयाबीन उत्पादन मिलता। इस आदिवासी किसान को चिन्ता सताने लगी है कि आखिर बैंक का कर्ज वह कैसे अदा कर पाएगा?

समूचे परिदृष्य से यह लगने लगा है कि क्षेत्र का अन्नदाता लगातार दूसरे साल प्रकृति की मार के आगे लाचार होकर अपने किस्मत को कोस रहा है। अब सिर्फ उम्मीद बची है तो सरकार कैसे मुश्किल की घड़ी में उसका साथ देती है। हालात संकटपूर्ण है ऐसे में सरकारी सहायता ही अन्नदाता को राहत दे सकती है।

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