नेत्रदान सिर्फ एक 100 ने मांगी आंखें

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 26-08-2017 / 8:08 PM
  • Update Date: 26-08-2017 / 8:08 PM

कोरबा। हर साल शिविरों में कई लोग नेत्रदान का संकल्प लेकर आगे आते हैं, लेकिन जब आंखें सुरक्षित करने का वक्त आता है, ऑपरेशन के लिए संसाधनों की कमी आड़े आ जाती है।

जरूरी उपकरणों की व्यवस्था नहीं होने के कारण लोगों का संकल्प और फिर से देख पाने लोगों की उम्मीद अधूरी रह जाती है।

दृष्टिविहीन होने का दंश झेल रहे ऐसे जरूरतमंद लोगों की आंखें लौटाकर जीवन में फिर से खुशियों के रंग भरने की जरूरत है। इस उद्देश्य को लेकर हर साल नेत्रदान शिविर लगाए जाते हैं और लोगों को नेत्रदान करने प्रोत्साहित भी किया जाता है।

बावजूद इसके जिला स्वास्थ्य विभाग के रिकार्ड पर गौर करें, तो नेत्रदान करने वालों की लिस्ट में मात्र एक नाम ही दिखाई देता है। दूसरी ओर दान की आंखें मांगने वालों की संख्या 100 पार कर चुकी है। ऐसा नहीं है कि अपेक्षा के अनुरूप लोगों में नेत्रदान के प्रति रूझान नहीं है।

हर साल कई जागरूक नागरिकों ने स्वयं से आगे आकर नेत्रदान की रूचि जाहिर की है। उन्होंने संकल्प भी लिया है कि मृत्यु के पश्चात्‌ उनकी आंखें किसी जरूरतमंद की जिंदगी रोशन करने दान की जाए। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग में जिला स्तर पर संसाधनों की कमी के चलते ऐसे दानदाताओं का संकल्प पूरा नहीं हो पाता।

 

नेत्रदान करने वालों की प्रक्रिया पूरी करने चिकित्सक स्वयं घर जाकर ऑपरेट करते हैं और निःशुल्क प्रक्रिया पूरी कर आंखें सुरक्षित करते हैं। इच्छुक व्यक्ति नेत्रदान के लिए नजदीकी नेत्रबैंक, मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल में संपर्क कर सकते हैं।नेत्र ऑपरेशन के बाद चश्मा पहनने वाले व्यक्ति पर अगर चाहें तो नेत्रदान कर समाज में योगदान दे सकते हैं।

यदि किसी व्यक्ति ने अपने जीवन में नेत्रदान की घोषणा नहीं भी की है, तो भी उनके रिश्तेदार मृत व्यक्ति का नेत्रदान कर सकते हैं। बावजूद इसके कई बार यह सुनने मिलता है कि दानदाता भटकने मजबूर हो रहे।

 

 

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