नई तकनीक से बंजर भूमि में कृषि

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 26-12-2015 / 5:06 PM
  • Update Date: 26-12-2015 / 5:06 PM

कुरुक्षेत्र। केन्द्र सरकार की ओर से बंजर भूमि में फसल पैदा करने की लागतार कोशिश की जा रही है। साथ ही बंजर एवं ऊसर हो चुकी मिट्टी को खेती योग्य बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यह सच है कि पिछले एक दशक में खेती योग्य जमीनें कम हुई हैं। कल-कारखाने से लेकर स्कूल, स्वास्थ्य केन्द्र सभी खुल रहे हैं। खेती योग्य जमीन का रकबा लगातार कम हो रहा है। लेकिन दूसरी सच्चाई यह है कि बंजर एवं ऊसर जमीनों को खेती योग्य बनाने की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण कार्य हुआ है। वैज्ञानिकों की ओर से दी गई विभिन्न सिफारिशों में मृदा संरक्षण की नीति अपनाई जा रही है। डूब एवं सूखे से प्रभावित इलाकों में नई-नई तकनीक के जरिए खेती की जा रही है। एसआरआई श्री तकनीक के जरिए देश में कम लागत में अधिक धान का उत्पादन किया जा रहा है।

विकासशील भारत विकसित बनने की तैयारी में है। गाँवों में शहरों जैसी सुविधाओं का विकास हो रहा है तो गाँव में शहर जैसे संसाधन भी विकसित हो रहे हैं। ऐसे में विकास में सबसे ज्यादा कमी जमीन की हुई है। कल-कारखाने लगे या बिजली के उपकेन्द्र खुले, सभी में जमीन की जरूरत पड़ती है। औसत रूप में कृषि योग्य उपजाऊ मिट्टी की गहराई 30 सेन्टीमीटर तक मानी जाती है। मृदा की चार परतें होती हैं। पहली अथवा सबसे ऊपरी सतह छोटे-छोटे मिट्टी के कणों और गले हुए पौधों और जीवों के अवशेष से बनी होती है। यह परत फसलों की पैदावार के लिए महत्त्वपूर्ण होती है। दूसरी परत महीन कणों जैसे चिकनी मिट्टी की होती है और तीसरी परत मूल विखंडित चट्टानी सामग्री और मिट्टी का मिश्रण होती है तथा चौथी परत में अविखंडित सख्त चट्टानें होती हैं।

भारत में कुल भूमि क्षेत्रफल करीब 329 मिलियन हेक्टेयर है। इसमें खेती करीब 144 मिलियन हेक्टेयर में होती है, जबकि लगभग 178 मिलियन हेक्टेयर भूमि बंजर है। इसे सुधारने के लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। वहीं असिंचित एवं डूब से प्रभावित जमीन को भी खेती योग्य बनाया जा रहा है। देश में करीब 71 लाख हेक्टेयर भूमि मृदा ऊसर से प्रभावित है। जबकि पूरे विश्व में यह आँकड़ा लगभग 9520 हेक्टेयर के करीब बताया जाता है। जो मृदा ऊसर से प्रभावित है, इसे भी खेती योग्य बनाने की कवायद चल रही है। आँकड़े बताते हैं कि भारत में वर्ष 1951 में मनुष्य भूमि अनुपात 0.48 हेक्टेयर प्रति व्यक्ति है, जो दुनिया के न्यूनतम अनुपातों में से एक है। वर्ष 2025 में घटकर यह आंकड़ा 0.23 हेक्टेयर होने का अनुमान है। ऐसे में खेती की मृदा संरक्षण के जरिए एक बड़ी चुनौती से निबटा जा सकता है। ऐसे में उपजाऊ मिट्टी की सुरक्षा के साथ ही अनुपजाऊ मिट्टी को भी कृषि योग्य बनाया जा रहा है।

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