कृषि उत्पादन वृध्दि में बीज की अहम भूमिका

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 26-12-2015 / 6:03 PM
  • Update Date: 26-12-2015 / 6:03 PM

कृषि उत्पादन वृध्दि में बीज सर्वाधिक अहम भूमिका रखता है ।अधिक उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों के उच्च गुणवत्ता वाले बीजों से उत्पादकता बीस से तीन प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है । प्रदेश में बीज प्रतिस्थापन दर लगभग 2 से 5 प्रतिशत है, जिसे आगामी दस वर्षो में 4 से 20 प्रतिशत तक किये जाने का कार्यक्रम बनाया है। विपुल उत्पादन देने वाली उननत किस्मों के बीजों का प्रजनक से आधार बीज उत्पादन कार्यक्रम लेने के लिए शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों की आधारभूत सुविधाओं का विकास किया जाना नितांत आवश्यक है । जिससे उत्पादकता में वृध्दि की जाकर प्रमाणित बीजों की उपलब्धता कृषकों को की जा सके । शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों पर बीजोत्पादन कार्यक्रम को सुचारू रूप से लेने के लिए कृषि आदानों की व्यवस्था, खेत की तैयारी से लेकर कटाई-गहाई, ग्रेडिंग-पेकिंग आदि व्यवस्था आवश्यक है ।

कृषकों को उच्च गुणवत्ताा के बीज की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिये आवश्यक है कि बीज परीक्षण प्रयोगशाला में कराया जाकर मानक स्तर के बीजों को ही उपलबध कराया जावें । प्रदेश में विभाग की एक मात्र प्रयोगशाला ग्वालियर में स्थित है, जिसकी कि, वार्षिक क्षमता 300 नमूनों के विश्लेषण की है। प्रयोगशाला से विश्लेषण क्षमता से दुगनों का विश्लेषण कराया जा रहा हैं । अत: बीज परीक्षण प्रयोगशाला का सुदृढ़ीकरण किया जाकर क्षमता में वृध्दि आवश्यक है, ताकि समयावधि में बीज के नमूनों का विश्लेषण किया जा सकें ।

 बीज उत्पादन कार्यक्रम
अधिक उत्पादन देने वाले उच्च गुणवत्ताा के बीजों का पर्याप्त मात्रा में उत्पादन के लिए आधार भूत सुविधाओं का विकास एवं उन्नत मानक स्तर के प्रमाणित बीज कृषकों का उपलब्ध कराकर उत्पादकता एवं उत्पादन में वृध्दि करना ।

योजना का स्वरूप
विपुल उत्पादन देने वाली उन्नत किस्मों के उच्च गुणवत्ताा के बीज समुचित मात्रा में उपलब्ध न हो पाने के बीजोत्पादन कार्यक्रम में वृध्दि की जानी आवश्यक है । शासकीय प्रक्षेत्रों पर प्रजनक से आधार बीज उत्पादन हेतु आधारभूत सुविधाओं के विकास, एवं प्रक्षेत्र पर लगने वाले आवर्ती एवं अनावर्ती व्यय की व्यवस्था उत्पादकता वृध्दि हेतु आवश्यक है। मानक स्तर के बीज उपलब्ध कराने के लिए बीज परीक्षण प्रयोगशाला का सुदृढ़ीकरण भी इस कार्यक्रम में सम्मिलित किया गया है।

आधारभूत सुविधाओं का विकास
शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों पर प्रजनक के आधार बीज उत्पादन कार्यक्रम हेतु आवश्यक आधारभूत संविधायें फेंसिंग, पाईपलाईन, केटल शेड, फार्म डगआऊट पॉण्ड, तालाब, जल निकास नाली, सिंचाई नालियाँ, प्रक्षेत्र विकास, बायोगैस मशीनरी, फार्म रोड़, सीड प्रोसेसिंग यूनिट, थ्रेसिंग फ्लोर की सुविधाएं उपलबध कराई जावेंगी ।

बीज उत्पादन कार्य कृषि प्रक्षेखें की सुविधाएं उपलब्ध कराना  
शासकीय कृषि प्रक्षेत्रों की बीजोत्पादन के लिए कृषि आदानों की व्यवस्था, खेत की तैयारी बुआई, निंदाई, कटाई, गहाई, ग्रेडिंग, पैकिंग, परिवहन भंडारण व्यवस्था के लिए शासकीय कृषि प्रक्षेंत्र के लिए प्रत्येक प्रक्षेत्र की अधिकतम रुपए 5 लाख प्रदाय किए जा सकते है । प्रक्षेत्रों के कार्यक्रम एवं व्यय सीमा का अनुमोदन आंचलिक प्रबंधक द्वारा फसल मौसम के पूर्व खरीफ 30 मई तक तथा रबी 30 अगस्त तक किया जावे। स्वीकृत सीमा में 10 प्रतिशत तक फेरबदल का अधिकार आंचलिक प्रबंधक को रहेगा । इससे अधिक परिवर्तन होने पर संचालक कृषि का अनुमोदन आवश्यक होगा ।
घटकवार कार्यक्रम क्रियान्वयन की प्रक्रिया

 आधारभूत सुविधाओं का विकास  
शासकीय कृषि प्रक्षेत्र के प्रभारी प्रक्षेत्र के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाओं का प्रस्ताव तैयार कर नियंत्रणकर्ता अधिकारी (उप संचालक कृषि/ आंचलिक प्रबंधक) के माध्यम से संचालनालय कृषि को भेजे । भेजे जाने वाले प्रस्ताव में प्राक्कलन/ कोटेशन आवश्यकता का औचित्य अनिवार्यत: भेजें । आंचलिक प्रबंधक जलवायु क्षेत्र प्राप्त प्रस्तावों को विधिवत परीक्षण कर 15 दिवस के अंदर संचालनालय को अपने अभिमत/ अनुशंसा के साथ प्रस्तुत करें। संचालनालय कृषि प्राप्त प्रस्तावों का विधिवत परीक्षण कर उपलबध धनराशि के आधार पर प्राथमिकता अनुरूप स्वीकृति प्रदान करें । स्वीकृति अनुरूप आवंटन उपलब्ध करायें ।

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