अल्कोहल के अधिक सेवन से वीर्य को नुकसान

  • ByJaianndata.com
  • Publish Date: 20-12-2015 / 5:12 PM
  • Update Date: 20-12-2015 / 5:12 PM

शराब का अधिक सेवन करना स्वास्थ्य के लिहाज से बिलकुल भी सही नहीं है, इसके कारण कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं होने लगती है। अगर शराब का नियमित रूप से अधिक सेवन किया जाए तो इससे वीर्य यानी स्पर्म को नुकसान हो सकता है। मशहूर नाटककार शेक्सपीयर ने कहा है, शराब कामेच्छा तो जगाती है। पर काम को बिगाड़ती भी है। यह बिलकुल भी सच है। शराब के सेवन से नपुंसकता का भी खतरा रहता है। इस लेख में विस्तार से जानिए कैसे अल्कोहल के अधिक सेवन से वीर्य को नुकसान होता है।

शोध के अनुसार
अधिक शराब के सेवन से स्पर्म काउंटिंग कम हो सकती है। एक सोध मे यह बात सामने आयी है। यह रिसर्च बीएमजे ओपन में छपी थी। इस सोध में 18-28 साल के 1200 डेनिश पुरूषों को शामिल किया गया। रिसर्च के दौरान 2008-2012 के बीच इन पुरूषों का मेडिकल परीक्षण किया गया। साथ ही उनके स्पर्म और ब्लड सैंपल भी लिए गए।

अधिक पीना नुकसानदेह
इस सोध में यह बात सामने आयी कि जो पुरूष बहुत ज्यादा मात्रा में ड्रिंक करते है उनकी स्पर्म क्वालिटी अच्छी नहीं है। शोध में यह बात भी सामने आई कि एल्कोहल की मात्रा कितनी ली गई है और स्पर्म की गुणवत्ता उसके बाद क्या रही या फिर इन दोनों के बीच  गहरा संबंध है या नहीं। इस रिसर्च में पाया गया कि  एक सप्ताह में 7.5 यूनिट एल्कोहल लेने का क्या प्रभाव पड़ता है। शोधकर्ताओं ने माना कि जो पुरूष  बहुत ज्यादा शराब पीते है उनकी स्पर्म की गुणवत्ता ना सिर्फ खराब होती है। बल्कि उनके गुप्तांग का शेप और साइज भी असामान्य होता है। ये प्रभाव हर सप्ताह 7.5 यूनिट एल्कोहल लेने के बाद स्पष्ट हुआ।

नकारात्मक प्रभाव
जब एक सप्ताह में एल्कोहल की यूनिट 37.5 तक पहुंच जाती है। तो इसका बहुत ज्यादा नकारात्मक प्रभाव होता है। एक बीयर के कंटेनर 2.3 यूनिट एल्कोहल होता है। ऐसे में शोधकर्ता सलाह देते है। कि पुरूषों को रोजाना शराब पीने बचना चाहिए और सप्ताह में 21-28 यूनिट से ज्यादा शराब नहीं पीनी चाहिए।

स्पर्म काउंटिंग भी कम होती है
शराब का अधिक सेवन करने के कारण पुरूषों के स्पर्म काउंट कम होने की संभावना भी रहती है। लगातार शराब के सेवन से शुक्राणुओं पर बुरा असर पड़ता है जितनी अधिक शराब का सेवन उतनी ही खराब का संतुलन का वीर्य। शराब के दुष्प्रभाव से हार्मोंन का संतुलन भी बिगड़ता है, जिससे शुक्राणुओं पर बुरा असर पड़ता है।

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